चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को “विकसित भारत के लिए शिक्षा : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020” विषय पर आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के शैक्षणिक भवन-सी स्थित गैलरी-8 में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) रंजीत प्रसाद, सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विभाग, एनआईटी जमशेदपुर रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरणीय चेतना और डिजिटल साक्षरता को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के समग्र विकास, चरित्र निर्माण तथा भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहते हुए वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नागरिक तैयार करने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि “मूल्यों, संस्कृति और उत्तरदायित्व से युक्त शिक्षा ही विकसित भारत की सशक्त नींव है।”
कुलपति ने नवाचार और अनुसंधान को बताया आवश्यक
कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, बहुआयामी, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से नवाचार, अनुसंधान, भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपनाकर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
भारतीय ज्ञान परंपरा और संवैधानिक मूल्यों पर हुई चर्चा
व्याख्यान के दौरान संवैधानिक कर्तव्यों, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक शिक्षा में भारतीय पारंपरिक ज्ञान की प्रासंगिकता पर भी विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों सहित 75 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
यह आयोजन भारतीय शिक्षा दिवस-2026 के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, जिम्मेदार नागरिकता और भारतीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. नितीश कुमार महतो और डॉ. सोमनाथ कर ने किया। अंत में डॉ. सोमनाथ कर ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

