धनबाद, 17 अगस्त: माइनिंग क्षेत्र में उत्पादन से पहले सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर देते हुए आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में सोमवार को पांच दिवसीय एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम (EDP) की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का विषय “माइन इलेक्ट्रिकल ड्राइव्स टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी चैलेंजेज” रखा गया है।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम 21 अगस्त तक चलेगा। इसमें 13 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान माइनिंग सेक्टर में इलेक्ट्रिकल ड्राइव्स, ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और नई तकनीकों से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी।
DGMS अधिकारी ने तकनीकी गलतियों से होने वाले हादसों पर चेताया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि DGMS के डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी (इलेक्ट्रिकल) प्रो. अजय सिंह रहे। उन्होंने कहा कि एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम प्रोफेशनल्स को अपने नियमित कार्यक्षेत्र से बाहर नई तकनीक और अन्य क्षेत्रों को समझने का अवसर देते हैं।
उन्होंने एक खदान दुर्घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि गलत आकार के कोर बैलेंस करंट ट्रांसफॉर्मर (CBCT) के कारण अर्थ फॉल्ट का पता नहीं चल पाया था और इससे एक व्यक्ति की जान चली गई। उन्होंने कहा कि छोटी तकनीकी चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
प्रो. अजय सिंह ने कार्यक्रम के दौरान अपने अनुभव और विभिन्न केस स्टडी प्रतिभागियों के साथ साझा करने की बात कही।
IIT ISM की माइनिंग विरासत और नई तकनीक पर चर्चा
कार्यक्रम की अध्यक्षता IIT (ISM) धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने की। उन्होंने संस्थान की करीब 100 वर्ष पुरानी माइनिंग विरासत और IIT ब्रांड की मल्टीडिसिप्लिनरी क्षमता को संस्थान की महत्वपूर्ण ताकत बताया।
उन्होंने कहा कि IIT (ISM) को अपनी पारंपरिक पहचान के साथ आधुनिक और बहुविषयक क्षमताओं को आगे बढ़ाना होगा। इस दौरान संस्थान के 17 विभागों के बीच इंटरडिसिप्लिनरी सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, बोकारो के निदेशक प्रो. उपेंद्र कुमार और टेक्नो इंडिया ग्रुप के तहत झारखंड गवर्नमेंट PPP मॉडल कॉलेजेज के निदेशक डॉ. सुदीप्त चक्रवर्ती कार्यक्रम में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में उपस्थित रहे।
ऊर्जा दक्षता और सुरक्षित माइनिंग पर फोकस
कार्यक्रम के को-कोऑर्डिनेटर प्रो. प्रदीप कुमार साधु ने कहा कि किसी भी औद्योगिक गतिविधि में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने अंडरग्राउंड माइंस में वेंटिलेशन जैसे अधिक ऊर्जा खपत वाले कार्यों के लिए ऊर्जा दक्ष इलेक्ट्रिकल ड्राइव्स की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने वायरलेस पावर ट्रांसफर और फ्लोटिंग सोलर PV सहित IIT (ISM) में चल रहे विभिन्न रिसर्च प्रोजेक्ट्स की जानकारी भी दी।
प्रो. उपेंद्र कुमार ने कहा कि AI, IoT, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसी तकनीकें माइनिंग सेक्टर में तेजी से बदलाव ला रही हैं। वहीं डॉ. सुदीप्त चक्रवर्ती ने मानव जीवन की सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मशीन और उपकरणों को बदला या ठीक किया जा सकता है, उत्पादन में हुए नुकसान की भरपाई भी संभव है, लेकिन मानव जीवन की भरपाई नहीं की जा सकती।
EDP में इन तकनीकों पर होंगे सत्र
कार्यक्रम के दौरान पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल ड्राइव्स, माइन मशीनरी, इक्विपमेंट हेल्थ मॉनिटरिंग, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस, अर्थिंग एंड ग्राउंडिंग और फ्लेमप्रूफ सिस्टम्स जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, IoT और AI आधारित माइन मॉनिटरिंग, नियामक मानक तथा दुर्घटना से जुड़े केस स्टडी भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. केसी जाना ने विभाग की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग में फिलहाल करीब 15-20 प्रायोजित शोध परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। कार्यक्रम के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रो. निताई पाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ फील्ड स्तर की चुनौतियों से जोड़ना और माइनिंग संचालन को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय तथा ऊर्जा दक्ष बनाने में मदद करना है।

