IIT ISM Dhanbad Orientation 2026: नए छात्रों से AI का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील, डॉ. सुव्रोकमल दत्ता ने दिया प्रेरक संदेश

IIT ISM Dhanbad Orientation 2026: नए छात्रों से AI का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील, डॉ. सुव्रोकमल दत्ता ने दिया प्रेरक संदेश

धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति, आर्थिक और राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. सुव्रोकमल दत्ता ने नए छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य मानव बुद्धिमत्ता और रचनात्मकता को आगे बढ़ाना होना चाहिए, न कि उसकी जगह लेना।

पेनमैन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों को तकनीक, अनुसंधान और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने की सलाह दी।

AI के साथ मानवीय सोच भी जरूरी

डॉ. दत्ता ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सूचना प्रौद्योगिकी तेजी से विकसित हो रही है। हालांकि, किसी भी तकनीक की वास्तविक शक्ति उसके उपयोगकर्ता की सोच, नैतिकता और मूल्यों पर निर्भर करती है।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित न रहें, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, स्वतंत्र सोच और सामाजिक जिम्मेदारी को भी अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाएं।

नवाचार और शोध से विकसित भारत का निर्माण

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आईआईटी (आईएसएम) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्रों के पास देश और दुनिया के लिए नई तकनीक और प्रभावी समाधान विकसित करने का सुनहरा अवसर है।

उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और समाज की बेहतरी के लिए तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी और आईआईटी (आईएसएम) के छात्र इस परिवर्तन के प्रमुख भागीदार बन सकते हैं।

खनन और क्रिटिकल मिनरल्स में संस्थान की वैश्विक पहचान

डॉ. दत्ता ने आईआईटी (आईएसएम) की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि खनन और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में संस्थान का शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। इससे छात्रों को वैश्विक स्तर पर शोध, नवाचार और करियर के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

उन्होंने संस्थान को अपनी “दूसरी कर्मभूमि” बताते हुए यहां के शैक्षणिक वातावरण और ऊर्जा की भी प्रशंसा की।

अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी पर दिया जोर

कार्यक्रम के दौरान डॉ. दत्ता ने छात्रों से अनुशासन, जिज्ञासा, निरंतर सीखने की आदत और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक होगी, जब उसका उपयोग मानवता और समाज के हित में किया जाए।

उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि भविष्य उन्हीं का है, जो ज्ञान के साथ मूल्यों और जिम्मेदारियों को भी समान महत्व देते हैं।

ओरिएंटेशन कार्यक्रम का उद्देश्य

यह व्याख्यान आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के ओरिएंटेशन कार्यक्रम का हिस्सा था। कार्यक्रम का उद्देश्य नए छात्रों को संस्थान की शैक्षणिक संस्कृति, मूल्यों, अनुसंधान के अवसरों और जिम्मेदार पेशेवर बनने की दिशा में प्रेरित करना है।

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