धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड में हाथियों के एक बड़े झुंड ने जमकर उत्पात मचाया है। गिरिडीह जिले के पीरटांड़ जंगल क्षेत्र से आए करीब 35 जंगली हाथियों ने मंगलवार देर रात पर्वतपुर और बसहा गांव में कई घरों को नुकसान पहुंचाया, जिससे प्रभावित परिवारों के सामने रहने और भोजन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
जानकारी के अनुसार, हाथियों का झुंड आधी रात के बाद गांव में घुस आया। ग्रामीणों के अनुसार, झुंड ने सबसे पहले कच्चे मकानों को निशाना बनाया। इस दौरान महालाल किस्कू और सुनील हेंब्रम सहित कई परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हो गए। घरों की दीवारें और छप्पर टूट जाने से परिवारों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी।
ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों ने केवल मकानों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि घरों में रखे धान, चावल और अन्य खाद्य सामग्री को भी नष्ट कर दिया। कई परिवारों का महीनों का राशन हाथियों के हमले में बर्बाद हो गया। मानसून की शुरुआत के बीच हुए इस नुकसान ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
पीड़ित महिला लीला कुमारी ने बताया कि हाथियों का झुंड अक्सर इसी तरह गांवों में प्रवेश करता है। उनके अनुसार, बड़े हाथी पहले घरों को तोड़ते हैं और उसके बाद छोटे हाथी अंदर घुसकर अनाज और अन्य खाद्य सामग्री खा जाते हैं। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में घर टूट जाने के बाद परिवारों के सामने आश्रय और भोजन दोनों का संकट खड़ा हो गया है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। वन विभाग की मशालची टीम और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर हाथियों को आबादी वाले क्षेत्र से दूर हटाने का प्रयास शुरू किया। वनकर्मी बहादुर महतो ने बताया कि हाथियों के झुंड को नवतार क्षेत्र की पहाड़ियों की ओर मोड़ा गया है और उन्हें मुख्य आबादी से दूर रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और रात के समय अकेले बाहर नहीं निकलने की अपील की है। साथ ही हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है।
गौरतलब है कि टुंडी और आसपास के क्षेत्रों में हाथियों का आतंक कोई नई समस्या नहीं है। पिछले कई वर्षों से जंगली हाथियों के झुंड फसलों, मकानों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
स्थानीय लोगों ने सरकार और वन विभाग से हाथी-मानव संघर्ष की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा और राहत उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें।
फिलहाल वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और उन्हें जंगल क्षेत्र की ओर वापस भेजने का प्रयास जारी है।

