हूल दिवस पर चंपाई सोरेन का हेमंत सरकार पर हमला, पेसा कानून और भोगनाडीह विवाद को लेकर साधा निशाना

हूल दिवस पर चंपाई सोरेन का हेमंत सरकार पर हमला, पेसा कानून और भोगनाडीह विवाद को लेकर साधा निशाना

हूल दिवस के अवसर पर झारखंड की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने धनबाद प्रवास के दौरान राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने भोगनाडीह में सिद्धू-कान्हू के वंशजों को नोटिस जारी किए जाने के मुद्दे और पेसा कानून में किए गए प्रावधानों को लेकर सरकार की आलोचना की।

धनबाद पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत

दुमका जाने के क्रम में चंपाई सोरेन धनबाद के सर्किट हाउस पहुंचे, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि हूल दिवस आदिवासी समाज के संघर्ष, स्वाभिमान और बलिदान का प्रतीक है तथा इस अवसर पर उत्पन्न विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भोगनाडीह में सिद्धू-कान्हू के वंशजों को नोटिस जारी किया जाना आदिवासी समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।

भोगनाडीह विवाद पर सरकार को घेरा

चंपाई सोरेन ने कहा कि हूल क्रांति अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनसंघर्ष की शुरुआत का प्रतीक रही है। उनके अनुसार, ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर उठाए गए प्रशासनिक कदमों से गलत संदेश गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आदिवासी इतिहास और अस्मिता की उपेक्षा कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पेसा कानून के प्रावधानों पर भी जताई आपत्ति

पूर्व मुख्यमंत्री ने पेसा कानून को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कानून के वर्तमान स्वरूप में ऐसे बदलाव किए गए हैं जो इसकी मूल भावना के अनुरूप नहीं हैं। उनके अनुसार, ग्रामसभा की पारंपरिक व्यवस्था और रूढ़िजन्य प्रथाओं से जुड़े प्रावधानों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक व्यवस्था की अनदेखी की जाती है, तो पेसा कानून के मूल उद्देश्य पर असर पड़ सकता है। यह टिप्पणी उनका राजनीतिक मत है।

मेडिकल कॉलेज के नाम और सरकार के कामकाज पर भी टिप्पणी

चंपाई सोरेन ने दुमका के नवनिर्मित फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नाम में “मुर्मू” शब्द जोड़ने की भी मांग की। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आदिवासियों, मूलवासियों, किसानों और विद्यार्थियों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है।

उन्होंने कहा कि जनता सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करेगी और भविष्य में अपना लोकतांत्रिक निर्णय देगी।

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