धनबाद। दीपावली और छठ महापर्व के उत्साह के बीच एसएसएलएनटी महिला महाविद्यालय में एक दिवसीय दिवाली मेले का आयोजन किया गया। मेले में छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता, हस्तकला, पाक-कला और उद्यमिता का शानदार प्रदर्शन किया। कुल 24 स्टॉलों के माध्यम से झारखंड की पारंपरिक लोककला, हस्तनिर्मित सजावटी सामान और स्थानीय व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया। सोहराय पेंटिंग से लेकर धुस्का, अरसा और रागी के लड्डू तक, मेले में स्थानीय संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली। आयोजन का उद्देश्य छात्राओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ व्यावहारिक और व्यावसायिक कौशल सीखने का अवसर देना था।
24 स्टॉलों पर सजे हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजन
मेले में कुल 24 स्टॉल लगाए गए, जिनमें प्रत्येक स्टॉल पर अधिकतम पांच छात्राओं ने भागीदारी की। यहां 10 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की कीमत वाले विभिन्न उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध थे। छात्राओं ने झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों को भी खास जगह दी। पतरा पीठा, रागी के लड्डू, धुस्का, अरसा और झालमुड़ी जैसे पकवानों के स्टॉल पर लोगों की दिलचस्पी देखने को मिली।
खाने-पीने के सामान के अलावा छात्राओं ने हस्तनिर्मित तोरण, सजावटी दीये, क्रोशिया से बने गुलदस्ते और फ्लावर पॉट्स भी तैयार किए थे। इन उत्पादों के जरिए छात्राओं ने अपनी कला और मेहनत को बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया। दिवाली की सजावट के लिए तैयार किए गए सामान भी मेले के आकर्षण का हिस्सा रहे।
सोहराय पेंटिंग बनी मेले का खास आकर्षण
मेले का विशेष आकर्षण बीएड सेमेस्टर-2 की छात्राओं की ओर से तैयार की गई पारंपरिक सोहराय पेंटिंग रही। मां उमा फाउंडेशन और कॉलेज के सहयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद छात्राओं ने कागज और दुपट्टों पर आकर्षक सोहराय कलाकृतियां बनाई थीं। इनकी कीमत 100 से 600 रुपये तक रखी गई थी।
सोहराय झारखंड की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छात्राओं ने इस कला को नए माध्यमों पर प्रस्तुत कर इसकी खूबसूरती को लोगों तक पहुंचाया। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक लोककला को पहचान दिलाने के साथ छात्राओं को कला के माध्यम से स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना भी था।

प्राचार्या ने कहा- पढ़ाई के साथ व्यावहारिक कौशल भी जरूरी
कॉलेज की प्राचार्या डॉ. शर्मिला रानी ने कहा कि छात्राओं की छिपी प्रतिभा को सामने लाना महाविद्यालय की प्राथमिकता है। पढ़ाई के साथ उन्हें उत्पाद तैयार करने, उनकी बिक्री करने और ग्राहकों के साथ बेहतर व्यवहार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि स्टॉलों का मूल्यांकन उत्पादों की गुणवत्ता और ग्राहकों के साथ व्यवहार के आधार पर किया गया। सर्वश्रेष्ठ स्टॉल को प्रथम पुरस्कार दिया जाएगा। अतिथि डॉ. दिव्या कश्यप ने भी छात्राओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खाने-पीने के सामान से लेकर पेंटिंग और क्रोशिया तक, सभी स्टॉल आकर्षक ढंग से सजाए गए थे। छात्राओं का उत्साह, मेहनत और हुनर प्रशंसनीय है।
छात्राओं को मिलेगा मेले की कमाई का पूरा मुनाफा
डिपार्टमेंट की छात्रा प्रज्ञा प्रसाद ने बताया कि दिवाली के अवसर पर उनके स्टॉल में सजावटी कलश, रंगोली के सामान और दीये उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा पारंपरिक पीठा और ठेकुआ भी छात्राओं ने खुद तैयार किया है। उन्होंने बताया कि कॉलेज में हर साल इस तरह के फेस्टिव स्टॉल लगाए जाते हैं, जिनमें प्राचार्या और प्रोफेसरों का मार्गदर्शन मिलता है।
बीएड विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. नूतन कुमारी ने बताया कि मेले से होने वाला पूरा मुनाफा छात्राओं को दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और उद्यमिता की भावना विकसित करना है। इस आयोजन के माध्यम से छात्राओं ने न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि झारखंड की लोककला, संस्कृति और पारंपरिक खान-पान की समृद्ध विरासत को भी लोगों के सामने प्रस्तुत किया।

