धनबाद। समाहरणालय में मंगलवार को आयोजित जनता दरबार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन ने आम लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान एक सात दिन के नवजात शिशु की गंभीर हृदय बीमारी का मामला सामने आया। बच्चे के परिजनों ने इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने तत्काल संज्ञान लिया और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत शिशु के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। फिलहाल नवजात कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती है। जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आरबीएसके के तहत बच्चे का उपचार केरल में कराया जाएगा।
सात दिन के नवजात के इलाज के लिए डीसी ने दिखाई तत्परता
जनता दरबार में पहुंचे परिजनों ने उपायुक्त को बताया कि उनके सात दिन के बच्चे को गंभीर हृदय संबंधी बीमारी है। नवजात का इलाज फिलहाल कोलकाता में चल रहा है, लेकिन परिवार के लिए उपचार का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। परिजनों ने जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपायुक्त आदित्य रंजन ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नवजात के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चे को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके। इस पहल से आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
आरबीएसके के तहत केरल में होगा उपचार
नवजात की गंभीर बीमारी को देखते हुए प्रशासन ने आरबीएसके के माध्यम से उपचार की व्यवस्था करने की पहल की है। जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, बच्चे का इलाज केरल में कराया जाएगा। फिलहाल नवजात कोलकाता में भर्ती है। आगे की चिकित्सा प्रक्रिया और उपचार की व्यवस्था संबंधित अधिकारियों के समन्वय से सुनिश्चित की जाएगी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान तथा उपचार में सहायता देने के उद्देश्य से संचालित किया जाता है। इस मामले में भी इसी कार्यक्रम के तहत नवजात को उपचार उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
जनता दरबार में कई अन्य समस्याओं को लेकर पहुंचे लोग
जनता दरबार में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याएं उपायुक्त के सामने रखीं। उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री आवास योजना, बकाया वेतन भुगतान और होमगार्ड से जुड़े मामलों को लेकर आवेदन दिए गए।
इसके अलावा अवैध कब्जा कर धमकी देने, भूमि विवाद, ई-कल्याण योजना और नामांकन से संबंधित समस्याएं भी सामने आईं। लोगों ने अपनी शिकायतों के समाधान के लिए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
अधिकारियों को समय-सीमा में कार्रवाई का निर्देश
उपायुक्त आदित्य रंजन ने सभी आवेदनों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को जांच कर नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राप्त शिकायतों का निष्पादन निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
जनता दरबार में एडीएम लॉ एंड ऑर्डर अरविंद कुमार ओझा भी उपस्थित थे। जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जनता दरबार का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं को सीधे सुनना और उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को जवाबदेह बनाना है।

