धनबाद। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रमुख और डुमरी विधायक जयराम महतो एक विवाद को लेकर चर्चा में हैं। धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के साथ कथित गाली-गलौज और धमकी से जुड़ा एक ऑडियो सामने आया है। मामले में थाना प्रभारी की शिकायत पर विधायक समेत 10 नामजद और 40-50 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं, वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि खबर लिखे जाने तक नहीं हुई है।
फर्जी दस्तावेज के मामले से शुरू हुआ विवाद
मामला बड़ापिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के नाम पर कथित फर्जी लेटर पैड, हस्ताक्षर और मुहर के इस्तेमाल से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि इन दस्तावेजों के माध्यम से जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र और वंशावली तैयार कराने का प्रयास किया जा रहा था।
इस मामले में पुलिस ने जेएलकेएम नेता गणेश दास को 21 अगस्त को हिरासत में लिया था। उनकी हिरासत की जानकारी मिलने के बाद विधायक जयराम महतो अपने समर्थकों के साथ रात में बरवाअड्डा थाना पहुंचे।
थाना परिसर में हंगामे का आरोप
पुलिस के अनुसार, थाना पहुंचने के बाद वहां हंगामा हुआ और हिरासत में लिए गए गणेश दास को जबरन छुड़ाने का प्रयास किए जाने का आरोप है। इसी दौरान विधायक और थाना प्रभारी के बीच कथित बातचीत का ऑडियो सामने आया।
वायरल ऑडियो में कथित तौर पर थाना प्रभारी के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल और धमकी दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
10 नामजद समेत 40-50 अज्ञात पर FIR
घटना को लेकर बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले में जयराम महतो समेत 10 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 40-50 अज्ञात समर्थकों को भी आरोपी बनाया गया है।
पुलिस अब पूरे घटनाक्रम, थाना परिसर में मौजूद लोगों और सामने आए आरोपों की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस संगठनों ने जताई नाराजगी
मामले को लेकर झारखंड पुलिस एसोसिएशन और पुलिस मेंस एसोसिएशन ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस संगठनों की ओर से मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है।
फिलहाल विवाद का केंद्र वायरल ऑडियो, थाना परिसर में हुए कथित हंगामे और विधायक समेत अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

