सिंदरी में FCI प्रबंधन के खिलाफ हजारों लोगों का मशाल जुलूस, बोले- मैनेजमेंट तेरी मनमानी नहीं चलेगी

सिंदरी में FCI प्रबंधन के खिलाफ हजारों लोगों का मशाल जुलूस, बोले- मैनेजमेंट तेरी मनमानी नहीं चलेगी

धनबाद/सिंदरी। एफसीआई प्रबंधन की कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को सिंदरी में सिंदरी बचाओ सामूहिक मोर्चा के नेतृत्व में मशाल जुलूस निकाला गया। मनोहरटांड और एसएल-2 कॉलोनी से महिला, पुरुष और बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने बिनोद बिहारी चौक, केनरा बैंक के समीप से रोडाबांध अंबेडकर चौक तक मार्च किया। इस दौरान एफसीआई प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

क्वार्टर खाली नहीं करने की चेतावनी

अंबेडकर चौक पर प्रदर्शनकारियों ने एफसीआई प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने कहा कि वर्षों से मनोहरटांड और एसएल-2 कॉलोनी में रह रहे परिवारों के साथ किसी भी तरह की मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे किसी भी स्थिति में अपने क्वार्टर खाली नहीं करेंगे। उनका कहना था कि स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी कर कोई भी फैसला लिया गया तो विरोध को और व्यापक किया जाएगा।

भाजपा नेता ने प्रबंधन को दी चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता धर्मजीत सिंह ने एफसीआईएल प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि दशकों से मनोहरटांड और एसएल-2 में रह रहे लोगों को कमजोर न समझा जाए। उन्होंने कहा कि सामूहिक मोर्चा एक भी क्वार्टर तोड़ने नहीं देगा और दोनों स्थानों के लोगों को क्वार्टर लीज पर देने की मांग की जाएगी।

मोर्चा के संयोजक रविंद्र प्रसाद सिंह समेत अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

महिलाओं और बच्चों की भी रही भागीदारी

मशाल जुलूस में महिलाओं और बच्चों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही। महिला समूह में सुनीता उपाध्याय, सुनीता घोष, अनीता श्रीवास्तव, बसंती मिश्रा, रंजू देवी, नीलम देवी, उमा देवी, सोनी देवी, चिंता दास, अनामिका तिवारी, रंजना शर्मा और अणिमा सिंह समेत कई महिलाएं शामिल थीं।

वहीं पुरुष समूह में रविंद्र प्रसाद सिंह, धर्मजीत सिंह, अशोक सिंह, करीमन पांडे, पवन शर्मा, शशि सिंह, नीतीश सिन्हा, अरमान, लड्डू, अरुण सिंह, अजय सिंह, अंगद सिंह और विजय पासवान समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने एफसीआई प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दिया कि स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण मशाल जुलूस पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।

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