मध्य प्रदेश सरकार ने नई वक्फ बोर्ड कमेटी में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया है। नए वक्फ कानून के लागू होने के बाद ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।
इस फैसले का कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विरोध किया है। उन्होंने कहा कि मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए सरकार को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात भी कही है।
प्रदेश सरकार ने 4 जुलाई 2026 को अधिसूचना जारी करते हुए मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है. नए 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों को शामिल किया गया है. नए बोर्ड में इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष भार्गव को सदस्य बनाया गया है. वहीं भाजपा नेता सरदार पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष (चेयरपर्सन) नियुक्त किया गया है.
बता दें कि भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि वह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. उनका कहना है कि नए वक्फ अधिनियम, 2025 की कई धाराओं को पहले ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और मामला विचाराधीन है. गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना विवादित प्रावधानों में से एक है. उन्होंने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय में मामला लंबित है, तब राज्य सरकार को इतनी जल्दबाजी में नया बोर्ड नहीं बनाना चाहिए.
बोर्ड में शामिल सदस्यों के नाम क्या है
सरदार पटेल और अनिमेष भार्गव के अलावा बोर्ड में यूनियन मिनिस्टर नजमा हेपतुल्ला, कांग्रेस विधायक आतिफ अकील, फैजान खान, फातिमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान और शबाना खान को भी सदस्य बनाया गया है. इसके अलावा पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त सत्येंद्र सिंह पदेन सदस्य होंगे.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जारिए कहा कि राज्य सरकार ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन का महत्वपूर्ण फैसला लिया है. नए कानून के तहत मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. नया बोर्ड वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार बनाया गया है.
क्या है पुरा विवाद
- वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 में केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है.
- इस कानून को कई पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
- सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कानून की कुछ विवादित धाराओं पर अंतरिम रोक लगाई थी, लेकिन अन्य प्रावधानों पर सुनवाई अभी जारी है.

