दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, 37.50 लाख की लूट का पर्दाफाश; कंपनी के दो कर्मचारी निकले मास्टरमाइंड

दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, 37.50 लाख की लूट का पर्दाफाश; कंपनी के दो कर्मचारी निकले मास्टरमाइंड

नई दिल्ली: उत्तर जिला पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर 37.5 लाख रुपये की कथित लूट की गुत्थी सुलझाते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया है. जिस वारदात को सड़क पर हथियारबंद लुटेरों द्वारा अंजाम दी गई लूट बताया जा रहा था, वह दरअसल कंपनी के ही दो कर्मचारियों की सोची-समझी साजिश निकली. पुलिस ने इस मामले में कंपनी के दो कर्मचारियों समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग पूरी लूटी गई रकम, 36.92 लाख रुपये, बरामद कर लिए हैं.

पुलिस के अनुसार, 9 जुलाई को एक निजी विज्ञापन एवं प्रकाशन कंपनी के कर्मचारी मोहन दास ने शिकायत दी थी कि वह अपने सहकर्मियों अभिषेक और योगेश के साथ चांदनी चौक से नकदी लेकर मालिक के घर जा रहा था. उसके पास 37.5 लाख रुपये और दूसरे कर्मचारी के पास 8 लाख रुपये थे. बुराड़ी फ्लाईओवर के पास बाइक सवार तीन बदमाशों ने उन्हें रोककर नकदी से भरा बैग लूट लिया.

पकड़े गए आरोपी का मोबाइल फोन कर्मचारियों के पास मिला

जांच के दौरान कर्मचारियों के बयानों में कई विरोधाभास मिले. पुलिस को सबसे ज्यादा शक तब हुआ जब कथित तौर पर पकड़े गए आरोपी का मोबाइल फोन कर्मचारियों की बाइक की डिक्की से बरामद हुआ. वहीं योगेश के कंधे पर दिखाया गया काटने का निशान भी जांच में संदिग्ध पाया गया.

अभिषेक और योगेश ने अपना जुर्म कबूल कर लिया

सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), तकनीकी विश्लेषण और लगातार पूछताछ के बाद अभिषेक और योगेश ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. दोनों ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्त विपिन और अन्य साथियों के साथ मिलकर पूरी लूट की योजना बनाई थी. विपिन पहले रोहिणी में कैफे चलाता था और वहीं उसकी दोनों कर्मचारियों से दोस्ती हुई थी. कर्मचारियों ने बताया था कि वे अक्सर बड़ी रकम लेकर आते-जाते हैं, जिसके बाद नकदी लूटने की साजिश रची गई.

पुलिस ने रणनीति बनाकर विपिन को झांसा दिया कि उसके साथी पुलिस के शक से बाहर हैं और अपने हिस्से की रकम मांग रहे हैं. इस चाल में फंसकर उसने अपनी लोकेशन बता दी, जिसके बाद जहांगीरपुरी से उसे गिरफ्तार कर लिया गया. उसके घर से 36.92 लाख रुपये नकद, चार मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद हुई.

उत्तर जिला की अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (Addl. DCP) निहारिका भट्ट ने बताया कि शुरुआती जांच में ही कर्मचारियों की कहानी पर संदेह हुआ. वैज्ञानिक जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरी साजिश का पर्दाफाश किया गया. उन्होंने कहा कि लगभग पूरी रकम बरामद कर ली गई है और फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है.

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