झारखंड के साइबर गढ़ जामताड़ा में पुलिस ने एक बार फिर कार्रवाई करते हुए 4 शातिर साइबर अपराधियों को दबोचने का दावा किया है। पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह को मिली गुप्त सूचना के आधार पर साइबर थाना प्रभारी राजेश मंडल के नेतृत्व में गठित टीम ने कर्माटांड थाना क्षेत्र के सकलपुर से गोपालपुर जाने वाली सड़क के पास पलास जंगल झाड़ में छापेमारी कर यह सफलता हासिल की।
गिरफ्तार अभियुक्तों में फारूक अंसारी (शहरपुरा), समसुद्दीन अंसारी (मदकपुर), जानी बाबू (दुमरिया) और कलीम अंसारी (कुरुवा) शामिल हैं। इनके पास से 08 मोबाइल, 10 सिम कार्ड और 01 मोटरसाइकिल जब्त की गई है।
पुलिस के अनुसार, ये अपराधी YONO ऐप चालू कराने के नाम पर लोगों को कॉल करते थे, व्हाट्सएप और स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए यूजर आईडी व पासवर्ड बनाकर नेट बैंकिंग से ठगी करते थे। इन पर साइबर अपराध थाना कांड संख्या 53/26, दिनांक 29.08.2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गंभीर सवाल और मौलिक विश्लेषण: जागरूकता का अभाव या पुलिसिया लीपापोती?
इस पूरी प्रेस विज्ञप्ति को बारीकी से देखने पर कई ऐसे गंभीर और बुनियादी सवाल खड़े होते हैं। जो पुलिस की कार्यप्रणाली और उनकी मंशा पर गहरा संदेह पैदा करता हैं:
पीड़ितों और ठगी की रकम का कोई अता-पता नहीं:
जारी की गई विज्ञप्ति में इस बात का दूर-दूर तक जिक्र नहीं है कि इन अपराधियों ने देश के किस राज्य के किस नागरिक को, कब और कितने रुपयों की चपत लगाई है। जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि पीड़ित कौन हैं और ठगी गई कुल रकम कितनी है। तब तक इस कार्रवाई को सिर्फ एक खानापूर्ति या ‘आंकड़ा बाजी’ ही माना जाएगा।
क्या जानकारियाँ जानबूझकर छुपाई जा रही हैं?
यदि पुलिस वाकई जनता के बीच जागरूकता फैलाना चाहती है। तो उन्हें यह बताना चाहिए था कि किन-किन बैंकों या राज्यों के लोग इनके शिकार बने। विशिष्ट विवरणों को छिपाना यह दर्शाता है कि पुलिस केवल कोरम पूरा कर रही है। इस प्रकार की अधूरी सूचनाओं से जनता में कोई ठोस जागरूकता पैदा होने वाली नहीं है।
पारदर्शिता की कमी और खोखले दावे
‘देश के विभिन्न राज्यों’ का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपा लेना आसान है। लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाने और अपराध के पूरे नेटवर्क (मास्टरमाइंड) तक पहुँचने का ब्योरा सामने नहीं आता। तब तक जामताड़ा में साइबर अपराध के कलंक को धो पाना असंभव है। ऐसी अधूरी और संदेहास्पद प्रेस विज्ञप्तियां पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

