केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘शहीद कैप्टन सुनील कुमार चौधरी रेलवे स्टेशन, कठुआ’ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोगों की मांग पर लिया गया है और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिक को श्रद्धांजलि देने का एक प्रयास है।
कैप्टन सुनील कुमार चौधरी भारतीय सेना की 11 गोरखा राइफल्स के अधिकारी थे। उन्होंने देश की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की थी। अपनी बहादुरी और साहस के लिए उन्हें सेना मेडल और मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था।
कैप्टन सुनील कुमार चौधरी का जन्म 22 जून 1980 को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में हुआ था. उनके पिता पी. एल. चौधरी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे. बचपन से ही उन्हें अनुशासन और देशसेवा का माहौल मिला. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने पुणे के गरवारे कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की पढ़ाई की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से एमबीए कोर्स में दाखिला लिया.
एमबीए की पढ़ाई के दौरान उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया. उनके छोटे भाई अंकुर चौधरी का चयन नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में हो गया और वह खड़कवासला में ट्रेनिंग ले रहे थे. इसी दौरान सुनील चौधरी ने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडेय की कहानी और उनकी वीरता के बारे में जाना. कैप्टन मनोज पांडेय भी 11 गोरखा राइफल्स से जुड़े थे. उनकी बहादुरी से प्रेरित होकर सुनील चौधरी ने सेना में जाने का फैसला किया.

