सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने सरकार पर उठाए सवाल

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने सरकार पर उठाए सवाल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को शनिवार (18 जुलाई) को प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

इस मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सोनम वांगचुक को बल प्रयोग कर उनके अनशन स्थल से हटाना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इस घटना की चर्चा पूरे देश और दुनिया में हो रही है। उनके अनुसार, कई लोग सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित हैं और इस कार्रवाई को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी भी जताई जा रही है।

दिल्ली पुलिस पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए धोखे से अचानक घुसे थे, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए. ये हमारी पुरजोर मांग है कि सोनम वांगचुक की चिकित्सा ‘न्यायिक निगरानी’ में हो क्योंकि  सोनम वांगचुक का जीवन मानवता, पर्यावरण-संरक्षण, लोकतांत्रिक मूल्यों, युवा ऊर्जा की प्रेरणा, साइंस और इनोवेशन के लिए अनमोल है.” 

बीजेपी सरकार पर अखिलेश यादव का तीखा हमला

अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “हमारे देश की जनता व समस्त विश्व इस समय बीजेपी सरकार को संदेह और सवाल भरी संदिग्ध नजर से देख रहा है. दमनकारी राजनीति करनेवाली बीजेपी सरकार की इस अवांछनीय कार्रवाई ने इंटरनेशनल लेवल पर हमारे देश की मानवीय और डेमोक्रेटिक इमेज को बेहद धूमिल और खंडित करने का काम किया है.” 

बीजेपी की नकारात्मक विचारधारा ही ‘विवाद’ की है; संवाद की नहीं

उन्होंने आगे लिखा, “बीजेपी ने न कभी महात्मा गांधी में विश्वास किया, न कभी उनके गांधीवादी तौर-तरीकों में विश्वास किया. बीजेपी की नकारात्मक विचारधारा ही ‘विवाद’ की है; संवाद की नहीं.” उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी निराशा का पर्याय बन चुकी है. बीजेपी सरकार नहीं, अहंकार है!

सपा चीफ ने आगे लिखा, “बीजेपी की सोच दरारवादी है, इसीलिए जहां भी एकता, सौहार्द और एकजुटता होती है, बीजेपी डरकर प्रतिक्रियावादी बनकर आंदोलनों को तितर-बितर कर देती है लेकिन बीजेपी भूल गई है कि आज की नई पीढ़ी ‘डिजिटल यूनिटी’ के माध्यम से वैचारिक क्रांति लाने में सक्षम है. ऐसा हुआ है, हो रहा है और होगा भी.

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