‘आक्रामक राजनीति से सत्ता तक’: कैसे सम्राट चौधरी बने बिहार के मुख्यमंत्री?

‘आक्रामक राजनीति से सत्ता तक’: कैसे सम्राट चौधरी बने बिहार के मुख्यमंत्री?

आठ माह पहले ही सम्राट बन गए थे मुख्यमंत्री, समझिए कैसे???..

एक डायलॉग याद है??? जिसका बाप अपराधी हो, वह क्या बोलेगा?? चुप बैठ, अरे! बैठ

  1. करीब आठ माह पहले की बात है. बिहार विधानसभा में SIR पर हंगामा जारी था.
  2. अचानक सम्राट चौधरी उठे. चिल्लाए- अरे! चुप बैठ, जिसका बाप अपराधी हो, वह क्या बोलेगा??— उनका हमला तेजस्वी यादव पर था.
  3. अब मुद्दे की बात – अप्रैल 2026 को बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया और भाजपा विधायक दल ने सम्राट चौधरी को अपना नेता चुना। 15 अप्रैल को वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे या मान लीजिए कि शपथ ले चुके.
  4. यह भाजपा के लिए पहला मौका है, जब उसका अपना चेहरा बिहार की सत्ता की कमान संभालेगा। लेकिन सवाल यह है कि सम्राट चौधरी ही क्यों?? पहली बार बीजेपी का सीएम, वह भी राजद, जदयू से होते हुए बीजेपी का मेंबर बना नेता? अपना मूल कैडर क्यों नहीं?
  5. सम्राट का उदय इतना तेज और निर्विवाद कैसे हुआ? कई कारण गिनाए जा सकते हैं—नीतीश कुमार की रणनीति, भाजपा की आंतरिक एकता —-—but सबसे बड़ा और निर्णायक कारण है, लालू परिवार पर उनका निरंतर और आक्रामक हमला।
  6. सम्राट चौधरी ने पिछले दो-तीन सालों में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और पूरे लालू परिवार को बिना लाग-लपेट के निशाना बनाया, उन्होंने जनता का मन जीता हो या नहीं जीता हो, बीजेपी और नीतीश कुमार का मन जरूर जीता. लालू परिवार विरोधियों का मन जीता.
  7. भाजपा के अंदर वे ‘लड़ाकू चेहरा’ बन गए । उन्होंने बार-बार कहा कि लालू परिवार ने 15 साल बिहार को लूटा, भ्रष्टाचार का गैंग चलाया और विकास की राह रोक दी। चारा घोटाला, लैंड फॉर जॉब्स घोटाला, बिहार को ‘जंगल राज’ में धकेलने का आरोप—यह सब वे हर मंच, हर सभा, हर इंटरव्यू में दोहराते रहे।
  8. लालू परिवार सिर्फ लूटने आया है, विकास की बात कभी नहीं कर सकता. यह बिहार का लुटेरा परिवार है, जैसे उनके बयान वायरल होते रहे।
  9. यह आक्रामकता रणनीतिक थी। लालू परिवार बिहार की राजनीति में मजबूत चेहरा है। सम्राट चौधरी ने इस परिवार को ‘परिवारवाद और भ्रष्टाचार का प्रतीक’ बताकर खुलकर चुनौती दी। उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। तेजस्वी यादव जब विकास की बात करते तो सम्राट तुरंत जवाब देते—पहले अपने परिवार के घोटालों का हिसाब दो।
  10. यह सीधा, बिना डर का अंदाज बीजेपी, नीतीश कुमार को पसंद आया, लालू परिवार विरोधियों को पसंद आया.
  11. आंकड़े भी इसी बात की पुष्टि करते हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले सम्राट चौधरी की रैलियों में भीड़ बढ़ने लगी थी। जहां लालू परिवार ‘जनता का मुद्दा’ उठाता, वहां सम्राट उसे ‘परिवार का मुद्दा’ बता देते। उन्होंने लालू परिवार को ‘आतंक का प्रतीक’ तक कहा। 12.इस आक्रामकता ने न सिर्फ आरजेडी को बैकफुट पर धकेला बल्कि नीतीश कुमार को भी यह विश्वास दिलाया कि सम्राट ही वह चेहरा हैं, जो पूर्ण बहुमत दिला सकते हैं। तेजस्वी को जवाब दे सकते हैं. नीतीश जब राज्यसभा के लिए जा रहे थे, तो उन्होंने सम्राट की ओर इशारा कर कहा था कि बिहार अब इनके हाथ में सुरक्षित है। यह बयान भी सम्राट की लालू-विरोधी छवि का नतीजा था।

13.अगर सम्राट चौधरी ने लालू परिवार पर नरम रुख अपनाया होता, तो वे उपमुख्यमंत्री से आगे नहीं बढ़ पाते। उनकी आक्रामकता ने उन्हें ‘लालू परिवार विरोध’ का प्रतीक बना दिया।
14.इसी बात ने भाजपा हाईकमान का भी मन बदल दिया। नरेंद्र मोदी, अमित शाह ने सम्राट को बिहार का नया चेहरा चुना, क्योंकि वे जानते हैं—लालू परिवार पर लगातार और आक्रामक हमला सम्राट ही कर सकते हैं.

15.आज जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं, तो यह साफ है कि लालू परिवार विरोधी आक्रामकता ही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी है. यह पूंजी उन्हें सत्ता के शिखर तक ले गई. लालू परिवार पर हमला सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने का सबसे बड़ा और अटल कारण साबित हुआ है।
16.इसलिए कि बिहार में अब भी लालू परिवार राजनीति के केंद्र में है., जो केंद्र के सामने खडा होता है, जय-पराजय उसी की होती है. इतिहास गवाह है. है कि नहीं??? बाकी राजनीति है तो जाति-पाति तो रहेगा ही.

NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *