कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को बताया मोक्ष का साधन, सिंदरी में शिव-पार्वती विवाह प्रसंग ने मोहा मन

कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को बताया मोक्ष का साधन, सिंदरी में शिव-पार्वती विवाह प्रसंग ने मोहा मन

सिंदरी, धनबाद: कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बताया जाता है। सिंदरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन अयोध्या से पधारीं अंतरराष्ट्रीय कथा प्रवक्ता परम पूज्य पंडित गौरांगी गौरी ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनाया। उनकी कथा के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।

शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु

पंडित गौरांगी गौरी ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए माता पार्वती की कठिन तपस्या और भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि माता पार्वती की अटूट श्रद्धा और तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हें अपनी शक्ति के रूप में स्वीकार किया।

कथा के दौरान उन्होंने भगवान शिव की अनोखी बारात का प्रसंग भी सुनाया। मान्यता के अनुसार, भगवान शिव जब भूत-प्रेत और गणों के साथ राजा हिमाचल के यहां बारात लेकर पहुंचे, तो बारात का स्वरूप देखकर माता पार्वती के माता-पिता आश्चर्यचकित रह गए। इसके बावजूद माता पार्वती ने प्रसन्नता के साथ भगवान शिव को अपने पति के रूप में स्वीकार किया।

शिव की बारात में देवी-देवताओं से लेकर सभी जीवों की उपस्थिति

कथा प्रवक्ता ने बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह में देवी-देवताओं के साथ विभिन्न प्रकार के जीवों और शिवगणों की उपस्थिति का वर्णन मिलता है। भूत-प्रेत और गण भी इस विवाह उत्सव का हिस्सा बने और आनंद मनाया।

उन्होंने भगवान शिव को देवों के देव महादेव बताते हुए उनके स्वरूप और महिमा का वर्णन किया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक आस्था का संदेश दिया गया।

शिव आराधना से मन को शांति मिलने का संदेश

पंडित गौरांगी गौरी ने कहा कि भगवान शिव की आराधना से मनुष्य को सुख और शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने भक्ति को जीवन में सकारात्मकता और आपसी सद्भाव बढ़ाने का माध्यम बताया। उनके अनुसार, आध्यात्मिक विचारों को अपनाने से लोगों के बीच प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत हो सकती है।

कथा के दौरान भजन और धार्मिक प्रसंगों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया और भक्ति संगीत के साथ भाव-विभोर होते नजर आए।

मुख्य यजमान सहित श्रद्धालुओं ने किया कथा श्रवण

कार्यक्रम में मुख्य यजमान श्रीकांत सिंह अपने परिवार के साथ उपस्थित रहे। गीता देवी सहित कई श्रद्धालुओं ने भी परिवार के साथ कथा श्रवण किया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थिति रही और पूरा पंडाल श्रद्धालुओं से भरा नजर आया।

श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक परंपराओं, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया जा रहा है।

रिपोर्ट: राज कुमार शर्मा के साथ प्रेम प्रकाश शर्मा, सिंदरी

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