Sindri FCIL Quarter Rent: 6.50 रुपये प्रति वर्ग फीट किराये का विरोध, RTI के हवाले से कांति सिंह ने उठाए सवाल

Sindri FCIL Quarter Rent: 6.50 रुपये प्रति वर्ग फीट किराये का विरोध, RTI के हवाले से कांति सिंह ने उठाए सवाल

धनबाद/सिंदरी। सिंदरी में फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (FCIL) के आवासों के नए किराये को लेकर विवाद सामने आया है। बाबू कुंवर सिंह समिति के महासचिव कांति सिंह ने प्रबंधन की ओर से तय किए गए कथित नए किराये पर सवाल उठाते हुए स्थानीय निवासियों से 6.50 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से किराया तय करने वाले 11 महीने के फॉर्म को नहीं भरने की अपील की है। उन्होंने इस मामले में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), बोकारो से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी का हवाला दिया है।

कांति सिंह के मुताबिक, FCIL प्रबंधन की नई किराया व्यवस्था से सिंदरी के करीब 8,600 क्वार्टरों में रहने वाले लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। हालांकि, किराया निर्धारण के आधार और लागू शर्तों पर FCIL प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

FCIL के नए किराये पर क्यों उठ रहे सवाल?

कांति सिंह का दावा है कि सिंदरी FCIL प्रबंधन ने क्वार्टरों के लिए 6.50 रुपये प्रति वर्ग फीट प्रति माह की दर से नया किराया निर्धारित किया है और निवासियों को 11 महीने का फॉर्म भरने का निर्देश दिया गया है।

उन्होंने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पुराने आवासों में रहने वाले परिवारों, खासकर कम आय वाले लोगों और बुजुर्गों के लिए इतना किराया देना मुश्किल हो सकता है। उनका कहना है कि किसी भी नई किराया व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके आधार, शर्तों और निवासियों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

RTI में SAIL बोकारो की लीज दरों का हवाला

कांति सिंह के अनुसार, SAIL बोकारो के केंद्रीय जन सूचना पदाधिकारी की ओर से 5 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में विभिन्न श्रेणियों के क्वार्टरों के सालाना लीज किराये की जानकारी दी गई है। उनके मुताबिक, पत्र में निम्न दरों का उल्लेख है:

  • सी-टाइप क्वार्टर: 375 रुपये सालाना
  • डी-टाइप क्वार्टर: 250 रुपये सालाना
  • ई-टाइप क्वार्टर: 162.50 रुपये सालाना

कांति सिंह का कहना है कि SAIL में 33 साल की लीज एकमुश्त राशि पर दी जाती है और मासिक किराया नहीं लिया जाता। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2026 में नवीनीकरण के दौरान एक प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने FCIL की प्रस्तावित किराया व्यवस्था की तुलना SAIL की लीज व्यवस्था से की है। हालांकि, दोनों कंपनियों की संपत्ति नीति, लीज की शर्तों और किराया निर्धारण के आधार में अंतर हो सकता है। इसलिए दोनों व्यवस्थाओं की समान शर्तों पर तुलना करने के लिए संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

800 वर्ग फीट के क्वार्टर पर सालाना 62,400 रुपये का दावा

कांति सिंह ने कहा कि सिंदरी के कई क्वार्टर वर्ष 1955 से 1960 के बीच बने थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि SAIL में कुछ श्रेणियों के क्वार्टरों के लिए सालाना लीज राशि निर्धारित है, तो FCIL में मासिक किराये की इतनी ऊंची दर क्यों लागू की जा रही है।

उनके मुताबिक, 800 वर्ग फीट के क्वार्टर पर 6.50 रुपये प्रति वर्ग फीट प्रति माह की दर से किराया 5,200 रुपये मासिक और 62,400 रुपये सालाना होगा। उन्होंने कहा कि सिंदरी में 12,000 से 15,000 रुपये मासिक आय पर परिवार चलाने वाले लोग और 75 से 85 वर्ष के बुजुर्ग इस खर्च को लेकर चिंतित हैं।

कांति सिंह ने आशंका जताई कि 11 महीने के फॉर्म को भरने से निवासी भविष्य में किराया बढ़ोतरी की शर्तों से बंध सकते हैं। यह उनकी आशंका है; फॉर्म की वास्तविक शर्तों की पुष्टि उसके दस्तावेजों से ही हो सकेगी।

धरना नहीं, कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी

कांति सिंह ने कहा कि उनकी समिति इस मामले में धरना-प्रदर्शन के बजाय कानूनी रास्ता अपनाएगी। उन्होंने SAIL की तर्ज पर 33 साल की लीज व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि FCIL सिंदरी में कर्मचारियों की कमी के बीच भू-संपदा अधिकारी और प्रबंधक दिल्ली मुख्यालय को गलत जानकारी दे रहे हैं। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।

कांति सिंह के अनुसार, इस मुद्दे पर भाजपा जिला प्रकोष्ठ के दिनेश सिंह और समाजसेवी विजय सिंह भी उनके साथ हैं। अब मामले में FCIL प्रबंधन की प्रतिक्रिया और किराया निर्धारण से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

रिपोर्ट: NEWS ANP के लिए सिंदरी से राज कुमार शर्मा के साथ प्रेम प्रकाश शर्मा।

संपादकीय नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध विवरण और कांति सिंह के बयानों पर आधारित है। SAIL की RTI संबंधी जानकारी, FCIL के किराया आदेश और 11 महीने के फॉर्म की शर्तों की मूल दस्तावेजों से पुष्टि के बाद ही दोनों कंपनियों की व्यवस्थाओं पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

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