Saudi Arabia News: हूती हमलों से बढ़ी सऊदी अरब की चिंता, MBS की सुरक्षा कड़ी; एयरपोर्ट और तेल ठिकाने निशाने पर

Saudi Arabia News: हूती हमलों से बढ़ी सऊदी अरब की चिंता, MBS की सुरक्षा कड़ी; एयरपोर्ट और तेल ठिकाने निशाने पर

सऊदी अरब पर हूती हमलों से बढ़ी सुरक्षा चिंता

सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमलों में तेजी आने की खबरों के बीच देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और वह बंकरों से लैस, कड़ी सुरक्षा वाले महलों में रह रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वह मंगलवार के बाद से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।

बताई गई घटनाओं में सऊदी अरब के हवाई अड्डों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। इन घटनाओं से राजधानी रियाद और देश के अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

एयरपोर्ट और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोहियों के हमलों में हवाई अड्डों, रिफाइनरियों और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन जैसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे बिना कच्चे तेल के निर्यात में अहम भूमिका निभाती है।

रियाद में मिसाइल हमलों की खबरों के बीच एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोके जाने के बाद उसका मलबा एक किंडरगार्टन और मेडिकल क्लिनिक परिसर पर गिरने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। इन घटनाओं के बाद नागरिकों और जरूरी सेवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

हवाई यातायात पर भी असर पड़ने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, कतर एयरवेज ने रियाद और दम्मम के लिए उड़ानें रोक दी हैं, जबकि किंग खालिद हवाई अड्डे का संचालन शनिवार तक बंद रखने की अवधि बढ़ाई गई है।

मिसाइल इंटरसेप्टर की कमी और सहयोगियों से मदद की मांग

सऊदी अरब के सामने अपने विशाल क्षेत्र, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा करने की चुनौती है। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने मिसाइलों को हवा में रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले इंटरसेप्टर की कमी को लेकर चिंता जताई है।

सऊदी अरब अपने एयर डिफेंस सिस्टम को अलग-अलग स्थानों पर तैनात कर रहा है। साथ ही, उसने पाकिस्तान और अन्य सहयोगियों से अतिरिक्त सैन्य सहायता मांगी है और कूटनीतिक विकल्पों पर भी विचार किया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका ने सैन्य सलाहकार भेजे हैं, लेकिन हूती विद्रोहियों की बढ़त रोकने के लिए सऊदी अरब की सहायता संबंधी मांग पर अब तक अपेक्षित सहमति नहीं दी है।

सुरक्षा अलर्ट बंद होने पर उठे सवाल

सऊदी अरब ने मई में राष्ट्रीय प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली शुरू की थी। इसके जरिए मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों पर संभावित खतरों के अलर्ट भेजे जाते थे। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह हमलों से पहले इस प्रणाली से चेतावनियां जारी नहीं की गईं।

दो अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि एक पश्चिमी देश की सरकार ने सऊदी अधिकारियों से अलर्ट बंद किए जाने का कारण पूछा था। रिपोर्ट के अनुसार, जवाब में कहा गया कि बार-बार आने वाली चेतावनियों से लोगों को परेशानी होती थी और कुछ निवासियों ने रात में नींद खुलने की शिकायत की थी।

सऊदी अरब में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल रैटनी ने इस तरीके पर चिंता जताई। उनके अनुसार, हमलों से पहले चेतावनी नहीं मिलने पर लोगों में वही घबराहट पैदा हो सकती है, जिसे अधिकारी रोकना चाहते हैं।

इजरायल की भूमिका और भारत की प्रतिक्रिया

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल होने के लिए सऊदी अरब की मंजूरी चाहते हैं। इस मामले में अमेरिका दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहा है।

इधर, सऊदी अरब में हुए हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत की खबर के बाद भारत की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई से फोन पर बातचीत की।

भारत ने सऊदी अरब में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर बार-बार हो रहे हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए उन्हें तत्काल रोकने की मांग की है।

नोट: यह समाचार उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट पर आधारित है। सैन्य घटनाक्रम, उड़ानों की स्थिति और संबंधित अधिकारियों के बयानों की स्वतंत्र पुष्टि प्रकाशन से पहले की जानी चाहिए।

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