Delhi News: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बंद, रामलीला मैदान में धरने के लिए देने होंगे ₹1.21 लाख! जानें नए नियम

Delhi News: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बंद, रामलीला मैदान में धरने के लिए देने होंगे ₹1.21 लाख! जानें नए नियम

दिल्ली में प्रदर्शन के लिए बदले स्थल, जंतर-मंतर पर अब रोक

नई दिल्ली: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में बदलाव के बाद रामलीला मैदान की बुकिंग और शुल्क को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के स्थायी आदेश के मुताबिक, जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी। इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी (सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट) मैदान को प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किया गया है।

हालांकि, रामलीला मैदान पर प्रदर्शन आयोजित करना आसान नहीं होगा। अधिकारियों के मुताबिक, यह मैदान अगले ढाई महीने तक उपलब्ध नहीं है और इस वर्ष 29, 30 तथा 31 दिसंबर की तारीखों के लिए ही इसकी बुकिंग की जा सकती है।

रामलीला मैदान की बुकिंग पर कितना आएगा खर्च?

करीब 12 एकड़ में फैले रामलीला मैदान में लगभग 50,000 लोगों के एकत्र होने की क्षमता है। नगर निकाय के अधिकारियों के अनुसार, मैदान की बुकिंग दर 50,000 रुपये प्रतिदिन है। इसके अलावा 55,000 रुपये की जमानत राशि जमा करनी होती है, जिसे बाद में वापस किया जाता है।

कर सहित एक दिन की बुकिंग का शुरुआती खर्च लगभग 1.21 लाख रुपये बताया गया है। ऐसे में बड़े प्रदर्शन या जनसभा आयोजित करने वाले संगठनों को इसके लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था करनी होगी।

छोटे प्रदर्शनों के लिए सीमित जगह निशुल्क

दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि रामलीला मैदान के एक छोटे हिस्से में विरोध-प्रदर्शन और सभाएं निशुल्क आयोजित की जा सकती हैं। हालांकि, इस हिस्से में अधिकतम 150 लोगों के एकत्र होने की अनुमति होगी।

मैदान की बुकिंग MCD के बागवानी विभाग के माध्यम से होती है। आवेदन को मंजूरी देने से पहले दिल्ली पुलिस से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना आवश्यक है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए शुल्क नहीं देना पड़ता था, जबकि रामलीला मैदान में आयोजन पर काफी खर्च आएगा। वहीं, नगर निकाय के अधिकारियों के अनुसार, बिना शुल्क मैदान उपलब्ध कराने से निगम को प्रतिदिन कम से कम 50,000 रुपये या उससे अधिक का नुकसान हो सकता है।

त्योहारों के कारण पहले से बुक है मैदान

अधिकारियों के मुताबिक, दशहरा, दिवाली और अन्य कार्यक्रमों के कारण रामलीला मैदान आने वाले कई सप्ताह के लिए पहले से बुक है। इसी वजह से प्रदर्शन के लिए निकट भविष्य में तारीखें उपलब्ध नहीं हैं।

यह मैदान एक व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित है। इसके आसपास तीन अस्पताल और नगर निकायों के मुख्यालय हैं। ऐसे में किसी बड़े आयोजन के दौरान भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।

तालाब से राजनीतिक आंदोलनों के ऐतिहासिक मंच तक का सफर

रामलीला मैदान का इतिहास काफी पुराना है। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 1930 तक यहां तालाब था, जिसे भरकर समतल किया गया। वर्ष 1932 में यहां रामलीला मंचन की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है। आजादी के बाद 1951 में पाकिस्तान से आए शरणार्थियों की आजीविका के लिए भी इस क्षेत्र का विकास किया गया।

समय के साथ यह मैदान देश के कई प्रमुख राजनीतिक आंदोलनों और जनसभाओं का केंद्र बन गया। भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1952 में जम्मू-कश्मीर के भारत में एकीकरण की मांग को लेकर यहां सत्याग्रह शुरू किया था। जवाहरलाल नेहरू ने 1956 और 1957 में यहां जनसभाओं को संबोधित किया।

वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर जीत के बाद इंदिरा गांधी ने यहां रैली की थी। 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा वाले दिन जयप्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इसी मैदान में रैली को संबोधित किया था।

बाद के वर्षों में अन्ना आंदोलन ने भी इस मैदान को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। वर्ष 2013 में अरविंद केजरीवाल ने यहां मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति समाप्त होने के बाद अब रामलीला मैदान, बुराड़ी और सीबीडी मैदान की भूमिका बढ़ेगी। हालांकि, आयोजन की तारीख, शुल्क, पुलिस की अनुमति और स्थल की उपलब्धता प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों के लिए अहम पहलू बने रहेंगे।

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