सहरसा। सदर अस्पताल में एमडीएम खाने के बाद बीमार हुए बच्चों की रिपोर्टिंग करने पहुंचे प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार अभिषेक कुमार और अस्पताल प्रशासन के बीच विवाद का मामला सामने आया है। दोनों पक्षों की ओर से सदर थाना में आवेदन दिया गया है।
पत्रकार ने अपने आवेदन में अस्पताल के चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य लोगों पर मारपीट, गाली-गलौज, धमकी देने और सामान छीनने समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना शनिवार दोपहर करीब 2.30 बजे की बताई गई है।
पत्रकार के अनुसार, वह बीमार बच्चों की रिपोर्टिंग के लिए अस्पताल की आपातकालीन सेवा में पहुंचे थे। बच्चों का वीडियो बनाने के बाद अस्पताल के बाहर बरामदे में खबर के लिए पीटीसी कर रहे थे। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की शिकायत के बाद उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और गाली-गलौज की गई।
ओटी के कमरे में ले जाकर मारपीट का आरोप
पत्रकार ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि डॉ. एसके आजाद और अन्य लोगों के उकसाने पर करीब 20 से 25 लोगों को बुलाया गया। इसके बाद कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें जबरन ओटी की ओर ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया गया।
आवेदन में कमरे के अंदर गला दबाने और शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर प्रहार करने का भी आरोप लगाया गया है। पत्रकार ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए सदर अस्पताल परिसर और ओटी के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित कराने की मांग की है।
उन्होंने चिकित्सकीय जांच कराने के साथ ही घटना में शामिल बताए गए लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
नकदी, आभूषण और उपकरण छीनने का भी दावा
पत्रकार ने आरोप लगाया है कि कथित मारपीट के दौरान उनकी जेब में रखे करीब 2,500 रुपये, कान का सोने का कुंडल और गले की सोने की चेन छीन ली गई। इसके अलावा माइक और मोबाइल फोन तोड़े जाने का भी आरोप लगाया गया है।
आवेदन में एक चिकित्सक पर जहरीली सुई लगाने की धमकी देने और सुई से हमला करने के प्रयास का भी आरोप लगाया गया है।
घटना के बाद चोट लगने पर पत्रकार को इलाज के लिए श्री नारायण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराए जाने की बात कही गई है। पत्रकार ने पुलिस से कथित तौर पर छीने गए सामान की बरामदगी और टूटे उपकरणों की जांच कराने की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन ने पत्रकारों पर लगाया व्यवधान का आरोप
वहीं, दूसरी ओर सदर अस्पताल के अधीक्षक की ओर से भी सदर थाना में आवेदन दिया गया है। अस्पताल प्रशासन का आरोप है कि बीमार बच्चों को चिकित्सकीय सलाह और उपचार दिया जा रहा था। इसी दौरान विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकार बिना पूर्व अनुमति के बच्चों और उनके परिजनों से बयान लेने लगे, जिससे आपातकालीन वार्ड में इलाज प्रभावित हो रहा था।
अधीक्षक के आवेदन के अनुसार, प्रभारी अधीक्षक और अन्य चिकित्सकों ने पत्रकारों से आपातकालीन वार्ड से बाहर जाने का अनुरोध किया। अस्पताल प्रशासन का आरोप है कि कुछ पत्रकारों ने अनुरोध के बाद भी वार्ड से बाहर जाने से इनकार किया।
आवेदन में प्रभात खबर डिजिटल के अभिषेक कुमार के लाइव कवरेज करने और चेतन कुमार नामक पत्रकार के भी वहां मौजूद रहने तथा हंगामा करने का आरोप लगाया गया है।
दोनों पक्षों के आवेदन, जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामले में पत्रकार और अस्पताल प्रशासन दोनों की ओर से पुलिस को आवेदन दिए जाने के बाद अब जांच की प्रक्रिया पर नजर है। पत्रकार ने जहां मारपीट, धमकी, सामान छीनने और तोड़फोड़ के आरोपों की जांच की मांग की है, वहीं अस्पताल प्रशासन ने आपातकालीन वार्ड में इलाज के दौरान कथित व्यवधान और हंगामे की शिकायत की है।
पत्रकार की ओर से घटना से संबंधित वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की गई है। वहीं, अस्पताल प्रशासन की शिकायत में आपातकालीन सेवा में कामकाज प्रभावित होने का आरोप लगाया गया है।
डीएम ने एसडीओ और डीपीएम को सौंपी जांच
सहरसा के जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने कहा है कि पूरा मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने उचित न्याय के लिए सदर एसडीओ और डीपीएम को जांच के लिए भेजा है तथा तत्काल जांच रिपोर्ट मांगी है।
डीएम के अनुसार, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

