धनबाद: द ब्लैक पर्ल्स धनबाद, ऑल इंडिया कल्चरल काउंसिल और रंग संस्कार थिएटर ग्रुप, अलवर (राजस्थान) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रंगशाला 2026 के दूसरे दिन प्रतिभागियों को अभिनय के विभिन्न तकनीकी और रचनात्मक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया। लुबी सर्कुलर रोड स्थित विवाह भवन में आयोजित कार्यशाला में लाइट, कैमरा, वॉइस मॉड्यूलेशन और भारतीय रंगमंच के इतिहास पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।
अभिनय में लाइट और कैमरा की भूमिका पर विशेष चर्चा
कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षक डॉ. देशराज मीणा ने अभिनय में लाइट, कैमरा और मंचीय प्रस्तुति के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने वॉइस मॉड्यूलेशन, थ्री-डायमेंशनल स्टेज और फिल्म निर्माण की तकनीकों पर भी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि भारतीय फिल्मों में गीत, नृत्य और कई प्रस्तुति शैलियों पर पारसी रंगमंच का गहरा प्रभाव रहा है। शुरुआती फिल्मों के दृश्य और मंच सज्जा भी पारसी थिएटर की शैली से प्रेरित थे।
पारसी रंगमंच और भारतीय सिनेमा के इतिहास से कराया परिचय
प्रशिक्षण सत्र में प्रतिभागियों को पारसी रंगमंच की शुरुआत, उसके विकास और भारतीय सिनेमा पर उसके प्रभाव के बारे में बताया गया। डॉ. मीणा ने भारत की पहली फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ तथा अंग्रेजी शासन के दौरान स्थापित रंगमंच के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। साथ ही वर्तमान दौर की फिल्म मेकिंग प्रक्रिया और तकनीकी बदलावों की जानकारी भी साझा की गई।
50 से अधिक युवा ले रहे हैं प्रशिक्षण
कार्यक्रम संयोजक शारदा गिरी ने बताया कि रंगशाला 2026 में नाट्य कला से जुड़े युवा, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, फिल्म कलाकार, एंकर और कॉलेज के छात्र-छात्राएं सहित 50 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला के तीसरे दिन रांची के नाट्य कलाकार एवं प्रशिक्षक ऋषिकेश लाल अभिनय और मास्क निर्माण पर प्रशिक्षण देंगे।
कार्यक्रम में राम प्रवेश, शरद पांडेय, संजय माली सहित अन्य कलाकार एवं आयोजक भी उपस्थित रहे।

