जामताड़ा: कुछ व्यक्तित्व अपने काम, व्यवहार और सामाजिक जुड़ाव से ऐसी पहचान बनाते हैं, जो उनके जाने के बाद भी लोगों की स्मृतियों में जीवित रहती है। दो बार ‘श्रम श्री पुरस्कार’ से सम्मानित रामेश्वर तिवारी ‘बाबा’ का जीवन भी इसी तरह की प्रेरक यात्रा रहा। 85 वर्षों के जीवन में उन्होंने चित्तरंजन रेल इंजन कारखाने में अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया और परिवार के साथ-साथ समाज में भी अपनी अलग पहचान बनाई। सहजता, स्पष्टता, बेबाकी, निर्भीकता और सहभागिता उनके व्यक्तित्व की ऐसी विशेषताएं थीं, जिन्हें उनके परिचित आज भी याद करते हैं।
सिवान के गांव से शुरू हुआ जीवन का सफर
रामेश्वर तिवारी का जन्म 26 मार्च 1941 को बिहार के सिवान जिले के जीरादेई प्रखंड अंतर्गत तिवारी भटकन गांव में हुआ था। उनके पिता बिंदेश्वरी तिवारी थे। परिवार में वे दूसरे पुत्र थे, जबकि उनके बड़े भाई का नाम राजबल्लभ तिवारी था। उनकी पत्नी रिखी पति देवी थीं। वर्ष 1998 में पत्नी के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह रामेश्वर तिवारी पर आ गई। उस समय उनकी सबसे बड़ी पुत्री सविता को छोड़कर बाकी पांचों बच्चे छोटे थे। उन्होंने अगले 28 वर्षों तक बच्चों को मां और पिता दोनों का स्नेह और संरक्षण दिया।
उनके बड़े भाई राजबल्लभ तिवारी का निधन 12 मार्च 2011 को हुआ था। उनकी भाभी प्यारी देवी का निधन 21 दिसंबर 2022 को हुआ। राजबल्लभ तिवारी के तीन पुत्र अर्जुन देव तिवारी, शंकर तिवारी और धनंजय तिवारी हैं। अर्जुन देव दुमका में होटल व्यवसाय से जुड़े हैं, शंकर तिवारी चित्तरंजन में राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, जबकि धनंजय तिवारी साहेबगंज में पारिवारिक व्यवसाय संभालते हैं।

छह संतानों का परिवार और शिक्षा पर विशेष जोर
रामेश्वर तिवारी की छह संतानें हुईं, जिनमें तीन पुत्र और तीन पुत्रियां शामिल हैं। उनकी बड़ी पुत्री सविता तिवारी हैं। बड़े पुत्र डॉ. जोगिंदर तिवारी ने यूक्रेन से उच्च शिक्षा प्राप्त की और चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। मझले पुत्र योगेंद्र तिवारी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। वे झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के व्यापारिक क्षेत्र से जुड़े हैं। छोटे पुत्र अमरेन्द्र तिवारी ‘नन्हे जी’ ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
परिवार में शिक्षा, मेहनत और आगे बढ़ने की भावना को महत्व दिया गया। उनके जीवन में पारिवारिक जिम्मेदारियां और बच्चों का भविष्य हमेशा प्राथमिकता में रहा।

चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना बना कर्मभूमि, दो बार मिला श्रम श्री पुरस्कार
रामेश्वर तिवारी की व्यावसायिक यात्रा 1960 के दशक में चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना (CLW) से शुरू हुई। उस दौर में कारखाने में भाप इंजन का निर्माण होता था। समय के साथ तकनीक बदली और उन्होंने डीजल इंजन से लेकर आधुनिक थ्री-फेज इंजन निर्माण की प्रक्रिया में भी सक्रिय योगदान दिया।
कारखाने में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कार्यकुशलता, अनुभव और तकनीकी समझ के आधार पर अपनी अलग पहचान बनाई। उनके उत्कृष्ट कार्य और योगदान के लिए उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा दो बार ‘श्रम श्री पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने का उल्लेख मिलता है। यह सम्मान उनके पेशेवर जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा।
उनकी मेहनत और अनुभव ने परिवार की अगली पीढ़ी के लिए भी रास्ता तैयार किया। उनके पुत्रों और भतीजों ने आगे चलकर अपने-अपने क्षेत्रों में काम को विस्तार दिया।
रामेश्वर तिवारी से ‘बाबा’ बनने तक की पहचान
समय के साथ रामेश्वर तिवारी अपने परिवार और परिचितों के बीच केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अभिभावक के रूप में पहचाने जाने लगे। लोगों के स्नेह और सम्मान ने उन्हें ‘बाबा’ नाम दिया। उनके व्यक्तित्व की पांच प्रमुख विशेषताएं सहजता, स्पष्टता, बेबाकी, निर्भीकता और सहभागिता मानी जाती थीं।
वे अपनी बात साफ और स्पष्ट ढंग से रखने के लिए जाने जाते थे। सामाजिक और पारिवारिक मामलों में उनकी सहभागिता तथा लोगों के साथ आत्मीय व्यवहार ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। यही वजह रही कि उनके परिचितों के बीच ‘बाबा’ नाम एक सम्मान और अपनत्व का प्रतीक बन गया।
19 अक्टूबर को निधन, चित्तरंजन में हुआ अंतिम संस्कार
85 वर्ष की आयु में रामेश्वर तिवारी ‘बाबा’ का निधन 19 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी के दिन हुआ। अगले दिन 20 अक्टूबर को चित्तरंजन के बर्निंग घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े पुत्र डॉ. जोगिंदर तिवारी ने मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में परिजन, मित्र और शुभचिंतक शामिल हुए। नम आंखों से लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
नारायण बलि पद्धति से श्राद्ध, श्रद्धांजलि समारोह में उमड़े लोग
रामेश्वर तिवारी का श्राद्ध कर्म नारायण बलि पद्धति के अनुसार मिहिजाम-चित्तरंजन रोड स्थित उनके आवास पर संपन्न हुआ। इस अवसर पर ब्राह्मण भोज, दरिद्र नारायण भोज और रिश्तेदारों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। समारोह में बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और झारखंड से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पूर्व मंत्री, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी, वैज्ञानिक और चिकित्सक सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी।
अमरेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में हुआ आयोजन
श्राद्ध एवं श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन उनके छोटे पुत्र अमरेन्द्र तिवारी ‘नन्हे जी’ के नेतृत्व में किया गया। इसमें बाबा के सहयोगी शंकर घोष और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चित्तरंजन स्टेशन रोड पर सीमित स्थान होने के बावजूद कुशल प्रबंधन के साथ आवास से लेकर स्टेट बैंक तक तीन बड़े सफेद पंडाल बनाए गए थे।
समारोह में सभी वर्गों और धर्मों के लोगों की भागीदारी देखने को मिली। आयोजन की व्यवस्था और लोगों की व्यापक उपस्थिति की जामताड़ा सहित झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में चर्चा रही। इस दौरान जामताड़ा पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और तत्परता की भी सराहना की गई।
रामेश्वर तिवारी ‘बाबा’ का जीवन परिवार के प्रति समर्पण, कार्यक्षेत्र में उपलब्धियों और समाज के साथ आत्मीय संबंधों की कहानी के रूप में याद किया जाएगा। उनके जाने के बाद भी उनके व्यवहार, विचार और योगदान की स्मृतियां परिवार और परिचितों के बीच बनी रहेंगी।
रिपोर्ट: आर. पी. सिंह, जामताड़ा।

