धनबाद। रेलवे पेंशनरों, पारिवारिक पेंशनरों और कर्मचारियों को इलाज के दौरान आने वाली समस्याओं को लेकर रेलवे बोर्ड ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वैध मेडिकल कार्ड (उम्मीद कार्ड) होने के बावजूद विभिन्न पैनल अस्पतालों में उपचार नहीं मिलने की शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया है। ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) द्वारा इस मुद्दे को रेलवे बोर्ड के समक्ष उठाए जाने के बाद 6 जुलाई 2026 को विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया।
किसी भी पैनल अस्पताल में मिलेगा इलाज
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वैध उम्मीद कार्ड रखने वाले रेलवे कर्मचारी, पेंशनर और उनके आश्रित भारतीय रेल के किसी भी अनुबंधित (पैनल) अस्पताल में उपचार प्राप्त करने के पात्र हैं। यह सुविधा इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि लाभार्थी किस जोन, मंडल, रेलवे अस्पताल या हेल्थ यूनिट से संबद्ध है।
सभी रेलवे जोनों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश
बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे प्रशासन, प्रधान मुख्य चिकित्सा निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और रेलवे अस्पतालों को निर्देश दिया है कि जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इन निर्देशों के अनुपालन की निगरानी रेलवे बोर्ड स्तर से भी की जाएगी।
निजी अस्पताल इलाज से इनकार नहीं कर सकेंगे
रेलवे बोर्ड ने कहा है कि किसी भी पैनल अस्पताल के साथ किए गए अनुबंध में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होगा, जिससे किसी पात्र रेलवे लाभार्थी को इलाज से वंचित किया जा सके। इसके अलावा अस्पतालों के भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश पहले से लागू हैं, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
शिकायतों के त्वरित समाधान की होगी व्यवस्था
यदि किसी पैनल अस्पताल द्वारा इलाज देने से इनकार किया जाता है, तो उसकी शिकायत के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मरीजों से नियमित फीडबैक लेने की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे अस्पतालों की कार्यप्रणाली की निगरानी हो सके।
AIRF और ECRKU ने फैसले का किया स्वागत
ईसीआरकेयू के अपर महामंत्री एवं एआईआरएफ वर्किंग कमेटी सदस्य मोहम्मद ज़्याऊद्दीन ने कहा कि संगठन लगातार रेलवे कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए रेलवे बोर्ड स्तर पर प्रयास करता रहा है। वहीं ईसीआरकेयू धनबाद मंडल के मीडिया प्रभारी एन.के. खवास ने कहा कि नए दिशा-निर्देश लागू होने से इलाज के दौरान आने वाली कई व्यावहारिक समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है।

