बिहार(BIHAR): बिहार की सियासत में उस वक्त हलचल बढ़ गई जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार अचानक जेडीयू कार्यालय पहुंच गये। मौका था भामाशाह जयंती का, जहां पहले से ही कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, लेकिन नीतीश कुमार की अचानक मौजूदगी ने पूरे माहौल को खास बना दिया।जैसे ही नीतीश कुमार दफ्तर में दाखिल हुए, कार्यकर्ताओं ने तालियों की गूंज के साथ उनका स्वागत किया। करीब 10 मिनट तक वह वहां रहे, लेकिन इस दौरान हर कोई उनसे मिलने और उनका अभिवादन करने को उत्साहित नजर आया। मंच पर मौजूद नेताओं के साथ उन्होंने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कार्यकर्ताओं के बीच अपनापन दिखाया।
इस दौरान डिप्टी सीएम विजय चौधरी, बिजेंद्र यादव, लेसी सिंह, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी और रत्नेश सदा भी मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं के बीच पंपलेट बांटे गए, जिनमें भामाशाह की विरासत और पार्टी की विचारधारा को दर्शाया गया।कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में विजय चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार का पार्टी कार्यालय आना कोई नई बात नहीं है। वह समय-समय पर कार्यकर्ताओं से मिलने आते रहते हैं और कार्यक्रम भी उसी सिलसिले का हिस्सा था।
इस मौके पर नीतीश कुमार के विचारों को भी साझा किया गया। उन्होंने अपने संदेशों में कहा कि उनका काम ही उनकी पहचान है। राजनीति को उन्होंने सेवा का माध्यम बताया, न कि व्यक्तिगत लाभ का जरिया। उन्होंने ‘न्याय के साथ विकास’ के अपने मूल मंत्र को दोहराते हुए हर वर्ग के उत्थान की बात कही।उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी बड़ा काम आधे मन से नहीं किया जा सकता और बिहार को ऐसी ऊंचाई पर ले जाना है, जहां से उसे पीछे मुड़कर देखने की जरूरत न पड़े।नीतीश कुमार की इस अचानक मौजूदगी ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया कि वह पार्टी और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार जुड़े हुए हैं और आने वाले समय में उनकी सक्रियता और भी बढ़ सकती है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

