नई दिल्ली: NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में संजीव मुखिया को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच के निष्कर्षों में अंतर को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। CBI का कहना है कि संजीव मुखिया के खिलाफ प्रश्नपत्र की चोरी या वितरण में संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, जबकि EOU ने पहले उसे कथित मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल माना था।
EOU की जांच में क्या सामने आया था?
EOU ने अप्रैल 2025 में संजीव मुखिया को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, उसकी पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसे मामले का अहम किरदार माना गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, EOU ने यह भी दावा किया था कि संजीव मुखिया की मोबाइल लोकेशन गुजरात में मिली थी, जहां कथित तौर पर पेपर लीक से जुड़े घटनाक्रम हुए थे।
हालांकि, मोबाइल लोकेशन किसी व्यक्ति की संलिप्तता का स्वतः प्रमाण नहीं होती, लेकिन इसे जांच की एक महत्वपूर्ण परिस्थितिजन्य कड़ी माना जाता है।
CBI की जांच में क्या निष्कर्ष निकला?
CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर संजीव मुखिया के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकी। इसके बाद उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई। बाद में CBI ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसकी भूमिका सिद्ध नहीं हो सकी।
उठ रहे हैं ये प्रमुख सवाल
अब चर्चा का विषय यह है कि यदि EOU ने मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर संजीव मुखिया की भूमिका पर संदेह जताया था, तो CBI की जांच में उन तथ्यों का क्या निष्कर्ष निकला। यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर हुए, तो संजीव मुखिया तक साक्ष्यों की श्रृंखला क्यों नहीं पहुंच सकी।
जांच के विरोधाभास पर बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति को केवल मोबाइल लोकेशन, रिश्तेदारी या कथित संपर्कों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत में दोष सिद्ध करने के लिए प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत और पूरी श्रृंखला आवश्यक होती है।
फिलहाल यह मामला जांच एजेंसियों के अलग-अलग निष्कर्षों और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। CBI और EOU की जांच में सामने आए अंतर को लेकर सार्वजनिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं, जिन पर आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है।

