मुजफ्फरपुर : “SDPO राजेश कुमार शर्मा मेरे बेटे को पूछताछ के लिए ले गए और मार दिया। आश्चर्य की बात है कि हत्यारा होते हुए भी आज भी कुर्सी पर बैठा है। अगर उसे वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण नहीं मिलता, तो मेरा बेटा आज जिंदा होता।”
यह दर्दभरी आवाज है मुजफ्फरपुर की रहने वाली अनिता देवी की, जो अपने 17 वर्षीय बेटे मनीष महिवाल की मौत को आज भी नहीं भूल पाई हैं। अनिता देवी का आरोप है कि उनके बेटे को 4 नवंबर 2007 की रात पुलिस पूछताछ के नाम पर अपने साथ ले गई थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
परिजनों का कहना है कि जिस समय पूरा परिवार छठ महापर्व की तैयारियों में जुटा था, घर में खजुरी और ठेकुआ बनाए जा रहे थे, उसी दौरान खुशियों का माहौल मातम में बदल गया। परिवार को उम्मीद थी कि इस बार छठ पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा, लेकिन कुछ ही घंटों बाद बेटे का शव घर पहुंच गया।
पुलिस ने उस समय घटना को मुठभेड़ बताया था, जबकि परिजन शुरू से ही इसे फर्जी मुठभेड़ और पुलिसिया कार्रवाई का मामला बताते रहे हैं। अनिता देवी का कहना है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला और उनके बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों पर अब तक कड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
मां का दर्द आज भी उतना ही ताजा है जितना उस दिन था, जब छठ पूजा की तैयारियों के बीच उनके बेटे की मौत की खबर आई थी। परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

