धनबाद: झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मन्नान मल्लिक को बुधवार दोपहर धनबाद के शमशेर नगर स्थित कब्रिस्तान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम दर्शन और विदाई के लिए उनके हाउसिंग कॉलोनी स्थित आवास पर सुबह से ही जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
मंगलवार को हुआ था निधन
83 वर्षीय मन्नान मल्लिक का मंगलवार सुबह रांची स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर से धनबाद सहित पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार देर शाम उनका पार्थिव शरीर रांची से धनबाद स्थित उनके आवास लाया गया, जहां लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
बुधवार को अंतिम दर्शन के दौरान धनबाद सांसद ढुल्लू महतो, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, झरिया की पूर्व विधायक पूर्णिमा सिंह, कांग्रेस जिला अध्यक्ष संतोष सिंह, पूर्व विधायक आनंद महतो, कालीचरण, फूलचंद मंडल, समाजसेवी कुंभनाथ सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सभी ने उनके जनसेवा, राजनीतिक जीवन और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया।
जिला प्रशासन ने की राजकीय सम्मान की व्यवस्था
राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां की थीं। धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने मन्नान मल्लिक के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और कहा कि सरकार के निर्देशानुसार सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

वहीं, एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए, ताकि कार्यक्रम गरिमापूर्ण और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
बार एसोसिएशन ने भी दी अंतिम श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा के दौरान मन्नान मल्लिक के पार्थिव शरीर को धनबाद व्यवहार न्यायालय स्थित बार एसोसिएशन भवन के पास भी लाया गया। यहां जिला न्यायाधीश, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी, महासचिव जितेंद्र कुमार सहित अधिवक्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वयं अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के सदस्य रहे मन्नान मल्लिक के निधन पर पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र सहाय ने इसे विधि जगत और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ शमशेर नगर कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक और आम नागरिक मौजूद रहे।

