धनबाद: बैंक मोड़ स्थित डीएमसी मॉल में आयोजित दो दिवसीय ‘शिल्पोत्सव’ में कोडरमा के प्रसिद्ध पारंपरिक मिष्ठान केसरिया कलाकंद का स्टॉल भी लगाया गया। इस दौरान ‘कोडरमा केसरिया कलाकंद कल्याण स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड’ के प्रतिनिधियों ने इस पारंपरिक मिठाई को मिली जीआई पहचान और इसके पीछे किए गए प्रयासों की जानकारी साझा की।
शिल्पोत्सव में लगाया गया केसरिया कलाकंद का स्टॉल
रविवार को शिल्पोत्सव के उद्घाटन के बाद उपायुक्त आदित्य रंजन सहित अन्य अधिकारियों ने विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण किया। इसी दौरान उन्होंने केसरिया कलाकंद के स्टॉल का भी जायजा लिया।
समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि उपायुक्त आदित्य रंजन जब कोडरमा के उपायुक्त के रूप में कार्यरत थे, उस दौरान उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था, डेयरी उद्योग और पारंपरिक मिठाई व्यवसाय को बढ़ावा देने की दिशा में पहल की थी।
समिति ने उपायुक्त के प्रयास को बताया महत्वपूर्ण
समिति के अनुसार, उनके प्रयासों से कोडरमा के पारंपरिक मिष्ठान केसरिया कलाकंद को आधिकारिक तौर पर जीआई टैग प्राप्त हुआ। समिति ने कहा कि जीआई पहचान मिलने के बाद इस उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिली है।
समिति का कहना है कि जीआई टैग से उत्पाद की विशिष्ट पहचान को सुरक्षित रखने में मदद मिली है। साथ ही अनधिकृत बिक्री और नकल पर रोक लगाने में भी यह पहचान महत्वपूर्ण है।
स्थानीय कारोबार और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
समिति के मुताबिक, केसरिया कलाकंद को जीआई टैग मिलने से स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों और उद्यमियों के लिए रोजगार तथा आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
इसके अलावा कोडरमा की पारंपरिक मिठाई, स्थानीय स्वाद और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में भी इससे मदद मिलने की बात कही गई।
शुद्ध केसर की खुशबू और स्वाद की उपायुक्त ने की सराहना
स्टॉल भ्रमण के दौरान उपायुक्त आदित्य रंजन ने समिति के प्रतिनिधियों से करीब पांच मिनट तक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने शुद्ध केसर से तैयार किए जाने वाले केसरिया कलाकंद के स्वाद और खुशबू की सराहना की।
समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि कोडरमा के डेयरी उद्योग और पारंपरिक मिठाई व्यवसाय से जुड़े लोगों में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह है। उन्होंने केसरिया कलाकंद को नई पहचान दिलाने में सहयोग के लिए उपायुक्त के प्रयासों की सराहना की।

