रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से सीधे सुझाव मांगे हैं। मुख्यमंत्री ने ‘छात्रों की बात-छात्रों के साथ’ नाम से जनभागीदारी अभियान शुरू करने की जानकारी दी है।
मुख्यमंत्री ने छात्रों से अपील की है कि वे परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियों, अपने अनुभवों और बेहतर व्यवस्था से संबंधित सुझाव सरकार के साथ साझा करें। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार केवल सरकार के स्तर से संभव नहीं है और इसमें छात्रों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
हर जिले और शिक्षण संस्थान के छात्रों से सुझाव की अपील
मुख्यमंत्री ने झारखंड के प्रत्येक जिले और प्रखंड के साथ कॉलेज, विश्वविद्यालय तथा कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं से सुझाव देने का आग्रह किया है।
उन्होंने छात्रों से परीक्षा प्रणाली में नजर आने वाली कमियों के बारे में जानकारी देने और यदि किसी समस्या का सामना किया है तो उसका अनुभव साझा करने की अपील की। इसके अलावा छात्रों से परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए समाधान और सुझाव भी मांगे गए हैं।
सुझावों की विशेषज्ञों से होगी समीक्षा
मुख्यमंत्री के अनुसार, छात्रों की ओर से प्राप्त होने वाले सुझावों का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञों की मदद से इन सुझावों की समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जो सुझाव व्यावहारिक होंगे, उन्हें नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप निर्धारित समय सीमा के भीतर लागू करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है।
युवाओं के भरोसे से जुड़ा है परीक्षा सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार केवल परीक्षाओं से जुड़ा विषय नहीं है। यह झारखंड के युवाओं के विश्वास और लाखों परिवारों की उम्मीदों से भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने युवाओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने और अपने सुझाव सरकार तक पहुंचाने की अपील की।
इस पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं सुझाव
छात्र अपने सुझाव झारखंड सरकार के संवाद पोर्टल samvad.jharkhand.gov.in पर दर्ज कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने छात्रों से अपील की है कि वे परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने अनुभव और सुझाव साझा करें।
उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करने का लक्ष्य है, जिस पर राज्य के छात्र भरोसा कर सकें।

