धनबाद: केंदुआडीह प्रभावित क्षेत्र में भू-धंसान और गैस रिसाव के खतरे के बीच सुरक्षित पुनर्वास को लेकर तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होती नजर आ रही है। राजपूत बस्ती और मुस्लिम बस्ती के 170 विस्थापित परिवार पुनर्वास योजना से संतुष्ट होकर बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट होने के लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि, रैयतों का एक वर्ग अभी भी उचित मुआवजे और सुरक्षित पुनर्वास की मांग कर रहा है।
हाल ही में राजपूत बस्ती में बड़ा गोफ बनने के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे में बीसीसीएल और जेआरडीए के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रभावित परिवारों ने बेलगड़िया जाने पर सहमति जताई।
भू-धंसान के खतरे के बीच पुनर्वास पर बनी सहमति
केंदुआडीह प्रभावित क्षेत्र की राजपूत बस्ती में बने बड़े गोफ ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जमीन के नीचे लगातार हो रही हलचल और भू-धंसान के खतरे के बीच प्रभावित परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाना महत्वपूर्ण हो गया है।
केंदुआडीह वीटीसी में आयोजित बैठक में जेआरडीए और बीसीसीएल अधिकारियों ने ग्रामीणों के सामने पुनर्वास योजना की जानकारी रखी। अधिकारियों की ओर से बेलगड़िया टाउनशिप में उपलब्ध सुविधाओं और आर्थिक सहायता के बारे में बताया गया।
प्रत्येक परिवार को मिलेंगे दो क्वार्टर, ₹2.50 लाख की सहायता
पुनर्वास योजना के तहत प्रत्येक विस्थापित परिवार को बेलगड़िया टाउनशिप में दो क्वार्टर आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा परिवारों को कुल 2.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान बताया गया है।
शिफ्टिंग के दौरान 50 हजार रुपये शिफ्टिंग भत्ता, 50 हजार रुपये किराया भत्ता और 50 हजार रुपये आजीविका सहायता के रूप में कुल 1.50 लाख रुपये दिए जाएंगे। पुनर्वास के छह महीने पूरे होने के बाद एक लाख रुपये की शेष राशि का भुगतान किया जाएगा।
पुनर्वास पैकेज और अधिकारियों के आश्वासन से प्रभावित परिवारों ने संतोष जताया और बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट होने पर सहमति व्यक्त की।
मंदिर, मस्जिद और कब्रिस्तान की भी मांग
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने बेलगड़िया टाउनशिप में मंदिर, मस्जिद और कब्रिस्तान जैसी धार्मिक एवं सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी।
अधिकारियों ने बताया कि बेलगड़िया टाउनशिप में फिलहाल एक मस्जिद मौजूद है। ग्रामीणों की मांग को देखते हुए अतिरिक्त मंदिर, मस्जिद और कब्रिस्तान के निर्माण पर जेआरडीए की ओर से सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया गया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि पुनर्वास के दौरान केवल आवास ही नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक और धार्मिक जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
रैयतों को उचित मुआवजे का इंतजार
वहीं, केंदुआडीह क्षेत्र के सभी रैयत फिलहाल बेलगड़िया जाने के लिए तैयार नहीं हैं। कई रैयत अपनी पुश्तैनी जमीन और आजीविका को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि रैयत और गैर-रैयत को एक समान मानकर पुनर्वास करना उचित नहीं है।
रैयत शैलेश चंद्र घोष ने कहा कि रैयतों को उनकी जमीन के बदले उचित मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास मिलना चाहिए। यदि सरकार और बीसीसीएल उचित मुआवजा उपलब्ध कराते हैं, तो रैयत भी सुरक्षित स्थान पर जाने को तैयार हैं।
दावों की जांच के बाद होगा फैसला
रैयतों के मुआवजे से जुड़े सवाल पर पीबी एरिया के जीएम जयंत के दास ने बताया कि बीसीसीएल प्रबंधन खतरे की स्थिति को देखते हुए रैयतों से भी बेलगड़िया शिफ्ट होने का आग्रह कर रहा है।
उन्होंने कहा कि रैयतों के दावों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्रबंधन इस संबंध में आगे का निर्णय लेगा। उन्होंने बताया कि केंदुआडीह क्षेत्र को काफी समय पहले ही डेंजर जोन घोषित किया जा चुका है और बीसीसीएल लगातार लोगों से सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट होने का आग्रह करती रही है।
फिलहाल 170 परिवारों की बेलगड़िया जाने पर सहमति बनी है। हालांकि, रैयतों के मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे अभी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं।
पुनर्वास प्रक्रिया में मुआवजा बना अहम मुद्दा
केंदुआडीह में भू-धंसान और गैस रिसाव के खतरे के बीच 170 परिवारों का बेलगड़िया जाने के लिए तैयार होना प्रशासन और बीसीसीएल के लिए राहत की बात है। लेकिन रैयतों के उचित मुआवजे का सवाल अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
आने वाले दिनों में रैयतों के दस्तावेजों की जांच और उनके दावों पर होने वाला निर्णय पुनर्वास प्रक्रिया की अगली दिशा तय करेगा। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि सुरक्षित पुनर्वास के साथ उनकी सामाजिक, आर्थिक और आजीविका से जुड़ी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाएगा।

