झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं पर फिर बवाल, JPSC-JSSC को लेकर सरकार पर निशाना

झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं पर फिर बवाल, JPSC-JSSC को लेकर सरकार पर निशाना

रांची: JPSC-JSSC नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। जारी बयान में कहा गया है कि हाई कोर्ट के फैसले की परिस्थितियां राज्य सरकार के पहले के फैसलों से जुड़ी हुई हैं और यदि सरकार मामले को लेकर गंभीर होती तो सीबीआई जांच का आदेश दिया जा सकता था।

बयान में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संवैधानिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आयोग के फैसलों को बदलने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आरोप लगाया गया कि आयोग के चेयरमैन समेत सदस्यों के इस्तीफे के बाद भी सरकार ने छात्रों का आंदोलन समाप्त कराने के उद्देश्य से कैबिनेट के माध्यम से आदेश जारी किया।

JPSC की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

बयान में कहा गया कि यदि सरकार को JPSC की कार्यप्रणाली में किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका थी तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए थी। साथ ही यह सवाल उठाया गया कि आयोग के पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले निर्धारित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया।

आरोप लगाया गया कि सरकार को मामले से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी होने के बावजूद युवाओं को भरोसे में लेकर ऐसा निर्णय लिया गया, जिससे अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी।

JSSC CGL का भी किया गया जिक्र

बयान में JSSC CGL विवाद का जिक्र करते हुए कहा गया कि पिछले अनुभवों के बावजूद अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के आश्वासनों पर भरोसा किया। वक्तव्य में दावा किया गया कि आंदोलन के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सरकार के फैसलों और वादों के कारण फिर निराश हुए हैं।

साथ ही यह मांग उठाई गई कि नियुक्ति परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी की स्थिति में निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए, ताकि योग्य अभ्यर्थियों के हित प्रभावित न हों।

पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया की मांग

बयान में झारखंड में सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। कहा गया कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी पारदर्शी और भरोसेमंद नियुक्ति व्यवस्था का पूरी तरह स्थापित नहीं होना चिंता का विषय है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसे बुनियादी मुद्दों का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए। बयान में राज्य के युवाओं, छात्रों और आम लोगों से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की गई।

युवाओं के भरोसे का सवाल

वक्तव्य में कहा गया कि सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता केवल परीक्षार्थियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों का समाधान स्पष्ट, निष्पक्ष और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *