रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी को पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच के केंद्र में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) भी है।
सीआईडी की जांच से जुड़े उपलब्ध विवरण के अनुसार, TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने अपने कथित स्वीकारोक्ति बयान में परीक्षा का ठेका दिलाने के एवज में रिश्वत और कमीशन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
TDPL को ठेका दिलाने में दो करोड़ रुपये के सौदे का आरोप
जांच में सामने आए कथित बयान के अनुसार अभय कुमार तिवारी ने आरोप लगाया कि TDPL को JPSC की परीक्षाओं का काम दिलाने के लिए तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एवं झारखंड सरकार के पूर्व मुख्य सचिव सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एल. खियांगते के नाम पर दो करोड़ रुपये के सौदे की बात कही गई थी।
अभय तिवारी के कथित बयान के मुताबिक, परीक्षा संचालन से संबंधित भुगतान में 20 प्रतिशत कमीशन देने की शर्त भी रखे जाने की बात कही गई थी।
हालांकि, ये सभी बातें जांच के दौरान दिए गए कथित बयान और आरोपों पर आधारित हैं। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है।
धर्मेंद्र कुमार से जुड़े आरोप भी जांच के दायरे में
JPSC मेधा घोटाला मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सीआईडी ने 22 जुलाई को TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी को गोड्डा से गिरफ्तार किया था। वह पोड़ैयाहाट प्रखंड में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में कार्यरत था।
इसके बाद सीआईडी ने मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार की गिरफ्तारी अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान के बाद हुई।
अभय तिवारी के कथित बयान में आरोप लगाया गया कि धर्मेंद्र कुमार ने TDPL को JPSC में OTR, OMR, एडमिट कार्ड, उपस्थिति पंजी और प्रिंटिंग से जुड़े काम दिलाने की बात कही थी।
20 से 25 लाख रुपये कमीशन मांगने का आरोप
जांच से जुड़े कथित बयान के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार पर TDPL से 20 से 25 लाख रुपये कमीशन मांगने का आरोप लगाया गया है। साथ ही अभय तिवारी ने कथित तौर पर यह भी बताया कि धर्मेंद्र ने कुछ अभ्यर्थियों को JPSC परीक्षा पास कराने का आश्वासन देने की बात कही थी।
अभय तिवारी के अनुसार, उसने यह जानकारी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह को दी थी। कथित तौर पर इसके बाद कंपनी की ओर से संबंधित शर्तों को स्वीकार किए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद एजेंसी के दस्तावेज और प्रस्तुति से जुड़ी जानकारी धर्मेंद्र कुमार तक पहुंचाए जाने का भी दावा किया गया है।
मोरहाबादी मैदान में मुलाकात का भी जिक्र
अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, एजेंसी की प्रस्तुति के बाद उसकी धर्मेंद्र कुमार और TDPL के निदेशक रामवीर सिंह से मोरहाबादी मैदान में मुलाकात हुई थी।
कथित तौर पर इसी दौरान JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष के नाम पर दो करोड़ रुपये और काम दिलाने के एवज में 20 से 25 लाख रुपये कमीशन की मांग किए जाने की बात कही गई।
इसके अलावा परीक्षा संचालन से संबंधित एजेंसी की बिलिंग में 20 प्रतिशत राशि दिए जाने की शर्त का भी कथित रूप से जिक्र किया गया है।
सीट के बदले लाखों रुपये मिलने का भी आरोप
अभय तिवारी के कथित बयान में यह भी दावा किया गया है कि JPSC की एक सीट के बदले 30 से 40 लाख रुपये तक मिलने की बात कही गई थी। इसी आधार पर कथित कमीशन और अन्य शर्तों को स्वीकार किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, इन आरोपों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
जून 2025 में TDPL को मिला था परीक्षा संचालन का काम
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तत्कालीन JPSC अध्यक्ष से मुलाकात के बाद जून 2025 में TDPL को आयोग की परीक्षाओं के संचालन से संबंधित काम मिला था।
वहीं 14वीं सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए पंजीयन की अंतिम तारीख को 27 फरवरी 2026 से बढ़ाकर 9 मार्च 2026 किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
फिलहाल सीआईडी की जांच में सामने आए आरोपों और बयानों के आधार पर मामले की आगे की कार्रवाई जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित लेनदेन, परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

