झारखंड में सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता, ₹1 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार

झारखंड में सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता, ₹1 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार

गिरिडीह: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलों ने ₹1 करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी और पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को गिरिडीह जिले से गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ माओवादी संगठन के रीजनल कमेटी सदस्य मेहनत उर्फ मोछू और सक्रिय सदस्य गौरव उर्फ सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया है।

संयुक्त अभियान में मिली सफलता

जानकारी के अनुसार, मंगलवार देर शाम कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने सटीक खुफिया सूचना के आधार पर गिरिडीह-धनबाद सीमा क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान दो ग्रामीणों को भी हिरासत में लिया गया है। हालांकि उनके संबंध में आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

लंबे समय से था मोस्ट वांटेड

मूल रूप से गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनडीह गांव निवासी मिसिर बेसरा माओवादी संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई पोलित ब्यूरो का सदस्य था। उस पर विभिन्न राज्यों की ओर से कुल ₹1 करोड़ का इनाम घोषित था और वह सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह पिछले डेढ़ दशक से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है। सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है।

15 लाख के इनामी मोछू भी गिरफ्तार

गिरफ्तार मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू धनबाद जिले के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के घोड़ाबांधा गांव का निवासी है। वह माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य था और झारखंड सरकार ने उस पर ₹15 लाख का इनाम घोषित कर रखा था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, वह संगठन में लेवी वसूली, कैडर प्रबंधन और विभिन्न अभियानों के समन्वय में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी एजेंसियां

गिरफ्तार तीसरा आरोपी गौरव उर्फ सौरभ भी संगठन का सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां तीनों से पूछताछ कर संगठन के नेटवर्क, फरार माओवादियों और अन्य गतिविधियों की जानकारी जुटा रही हैं।

नक्सल विरोधी अभियान को मिली बड़ी सफलता

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से माओवादी संगठन की गतिविधियों और नेतृत्व क्षमता पर बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।

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