राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के बीच माना जा रहा है। नाथवानी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन प्राप्त है।
नामांकन को लेकर उठा विवाद
राज्यसभा चुनाव के दौरान परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर विवाद भी सामने आया। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनके नाम और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) से जुड़े कुछ दस्तावेजों पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता सलमान खुर्शीद भी पक्ष रखने पहुंचे थे।
हालांकि, निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद नाथवानी के नामांकन को वैध मानते हुए उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी। इसके बाद कांग्रेस ने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि नाथवानी समर्थकों ने इसे नियमसम्मत निर्णय बताया।
आंकड़ों का गणित और सियासी चुनौती
विधानसभा की वर्तमान संख्या बल के अनुसार इंडिया गठबंधन के पास पर्याप्त समर्थन होने का दावा किया जा रहा है। वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में सक्रिय हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में अक्सर क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक मतदान की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में अंतिम परिणाम केवल संख्या बल पर नहीं, बल्कि मतदान के दिन विधायकों की एकजुटता पर भी निर्भर करेगा।
कांग्रेस की बढ़ी चिंता
कांग्रेस अपने उम्मीदवार प्रणव झा की जीत सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय है। पार्टी ने नामांकन प्रक्रिया से लेकर राजनीतिक स्तर तक कई प्रयास किए हैं। दूसरी ओर, परिमल नाथवानी भी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात कर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि चुनाव के अंतिम चरण तक समीकरणों में बदलाव संभव है। ऐसे में सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।
18 जून को होगा फैसला
राज्यसभा चुनाव का परिणाम 18 जून को सामने आएगा। चुनावी गणित चाहे जो भी हो, लेकिन इस बार का मुकाबला झारखंड की राजनीति में खास दिलचस्पी का विषय बना हुआ है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दूसरी सीट पर जीत किसके खाते में जाती है और चुनावी रणनीति किस दल के पक्ष में काम करती है।
रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी खेमा अपनी चुनावी रणनीतियां बनाने में सक्रिय हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। वहीं, उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय है, जबकि दूसरी सीट के लिए मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी के बीच माना जा रहा है। नथवानी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का समर्थन हासिल है।
नामांकन को लेकर विवाद
चुनाव प्रक्रिया के दौरान परिमल नथवानी के नामांकन को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनके नाम और ‘हिंदू अविभाजित परिवार’ (HUF) से जुड़े कुछ दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील सलमान खुर्शीद भी पार्टी का पक्ष रखने के लिए पेश हुए थे।
हालांकि, सभी पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच करने के बाद, रिटर्निंग ऑफिसर ने नथवानी के नामांकन को वैध घोषित कर दिया और उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी। इसके बाद कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि नथवानी के समर्थकों ने इस फैसले को नियमों के अनुरूप बताया।
संख्या बल और राजनीतिक चुनौतियां
विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर, INDIA गठबंधन का दावा है कि उसके पास पर्याप्त समर्थन है। वहीं, BJP समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी भी अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज्यसभा चुनावों के दौरान अक्सर क्रॉस-वोटिंग और रणनीतिक वोटिंग की चर्चाएं सामने आती हैं। ऐसे में, अंतिम परिणाम न केवल संख्या बल पर, बल्कि मतदान के दिन विधायकों की एकजुटता पर भी निर्भर करेगा।
कांग्रेस के लिए बढ़ती चिंताएं
कांग्रेस अपने उम्मीदवार प्रणव झा की जीत सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। पार्टी ने नामांकन प्रक्रिया से लेकर राजनीतिक संपर्क साधने तक, विभिन्न स्तरों पर ठोस प्रयास किए हैं। दूसरी ओर, परिमल नथवानी भी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलकर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि जैसे-जैसे चुनाव अपने अंतिम चरण में पहुंचेगा, राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। इसलिए, सभी पार्टियां अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं।
18 जून को फैसला
राज्यसभा चुनाव के नतीजे 18 जून को घोषित किए जाएंगे। चुनावी गणित चाहे जो भी हो, इस मुकाबले ने झारखंड की राजनीति में काफी दिलचस्पी पैदा कर दी है। सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि कौन सी पार्टी दूसरी सीट जीतती है और किसकी चुनावी रणनीति सफल होती है।

