धनबाद/रांची: झरिया विधानसभा क्षेत्र समेत धनबाद जिले में जलभराव, दामोदर नदी और परित्यक्त कोयला खदानों में जमा पानी से जुड़ी संभावित आकस्मिक घटनाओं को देखते हुए स्थानीय गोताखोरों की स्थायी व्यवस्था और धनबाद में NDRF की स्थायी तैनाती का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया है। झरिया विधायक रागिनी सिंह ने मानसून सत्र के दौरान तारांकित प्रश्न के जरिए सरकार से इस संबंध में जानकारी मांगी।
विधायक ने कहा कि धनबाद की खनन-प्रधान भौगोलिक स्थिति को देखते हुए आपदा की स्थिति में तत्काल बचाव दल उपलब्ध होना जरूरी है।
स्थानीय गोताखोरों की स्थायी व्यवस्था पर सवाल
रागिनी सिंह ने सरकार से पूछा कि झरिया विधानसभा क्षेत्र सहित धनबाद जिला कोयला उत्खनन वाला क्षेत्र है, जहां दामोदर नदी और परित्यक्त कोयला खदानों में पानी जमा रहता है। ऐसी परिस्थितियों में आपात स्थिति के दौरान स्थानीय गोताखोरों की मदद लेने की जरूरत पड़ सकती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि स्थानीय गोताखोरों की मदद लिए जाने के बावजूद उनका स्थायी समायोजन क्यों नहीं किया गया है। साथ ही धनबाद जिला मुख्यालय में NDRF का स्थायी कार्यालय नहीं होने से आपदा के समय आने वाली चुनौतियों की ओर भी सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया।
47 गोताखोरों को दिया जा रहा Deep Diving प्रशिक्षण
सरकार की ओर से आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि धनबाद समेत विभिन्न जिलों के दो-दो गोताखोरों को मिलाकर कुल 47 गोताखोरों को Deep Diving का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सरकार के अनुसार इन गोताखोरों का बीमा भी कराया जा चुका है। प्रशिक्षण के बाद आवश्यक उपकरणों से लैस प्रशिक्षित गोताखोरों को घटना की प्रकृति के अनुसार अधिकतम 10 हजार रुपये तक की निर्धारित प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है।
धनबाद में NDRF तैनाती पर फिलहाल प्रस्ताव नहीं
विधायक के सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक धनबाद में NDRF की स्थायी प्रतिनियुक्ति से जुड़ा था। सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि धनबाद जिले में NDRF की स्थायी प्रतिनियुक्ति के संबंध में फिलहाल सरकार के समक्ष कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
सरकार के इस जवाब पर रागिनी सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि धनबाद और खासकर झरिया की परिस्थितियां सामान्य जिलों से अलग हैं। यहां बड़े पैमाने पर कोयला खनन, भूमिगत एवं परित्यक्त खदानें तथा दामोदर नदी जैसे जलस्रोत मौजूद हैं।
विधायक ने स्थायी बचाव तंत्र की मांग दोहराई
रागिनी सिंह के अनुसार किसी आकस्मिक घटना के बाद बाहर से राहत दल के पहुंचने का इंतजार करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। उनका कहना है कि स्थानीय प्रशिक्षित गोताखोरों को स्थायी व्यवस्था से जोड़ने और धनबाद में NDRF की स्थायी इकाई उपलब्ध होने से आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू किया जा सकेगा।
विधायक ने कहा कि यह मुद्दा केवल झरिया विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे धनबाद जिले की आपदा तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
सरकार की ओर से 47 गोताखोरों को प्रशिक्षण और बीमा उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। वहीं, धनबाद में NDRF की स्थायी तैनाती का प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं होने का जवाब दिया गया है। ऐसे में स्थानीय आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग आगे भी चर्चा में रहने की संभावना है।

