धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के ओरिएंटेशन कार्यक्रम-2026 के तहत नवप्रवेशित स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) और पीएचडी छात्रों को देश के दो प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों से संवाद का अवसर मिला। इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के अध्यक्ष एवं प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. शेखर सी. मांडे तथा आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की आयुष विशिष्ट वैज्ञानिक चेयर और टीसीएस रिसर्च एंड इनोवेशन में लाइफ साइंसेज रिसर्च की सलाहकार डॉ. शर्मिला मांडे ने विज्ञान, शोध और नवाचार के विभिन्न पहलुओं पर छात्रों का मार्गदर्शन किया।
प्रो. शेखर सी. मांडे ने शोध की जिम्मेदारियों पर दिया जोर
पेनमैन ऑडिटोरियम में आयोजित सत्रों में प्रो. शेखर सी. मांडे ने नवप्रवेशित यूजी छात्रों के साथ संवाद किया। इसके अलावा उन्होंने पीएचडी शोधार्थियों के लिए विशेष सत्र को भी संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल रोजगार या करियर का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के विकास और मानवता की सेवा का प्रभावी साधन है। उन्होंने छात्रों से जिज्ञासु बने रहने और वैज्ञानिक ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
प्रो. मांडे ने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल तत्काल परिणाम प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। कई बार ऐसा शोध, जिसका तत्काल उपयोग दिखाई नहीं देता, भविष्य में बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों की नींव बनता है।
बहुविषयक सोच और नवाचार अपनाने की सलाह
अपने संबोधन में उन्होंने शोधार्थियों को बहुविषयक सोच विकसित करने, नवाचार को अपनाने और धैर्य के साथ अनुसंधान करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए शोध कार्य करना है।
सत्र के दौरान छात्रों ने वैज्ञानिक करियर, अनुसंधान की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े कई प्रश्न भी पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से उत्तर दिया।
डॉ. शर्मिला मांडे ने इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च का महत्व बताया
गोल्डन जुबली लेक्चर थिएटर में आयोजित पीजी छात्रों के सत्र में डॉ. शर्मिला मांडे ने “Think Beyond Your Discipline: Importance of Interdisciplinary Research to Solve Real-World Problems” विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और सामाजिक समानता जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान किसी एक विषय के माध्यम से संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने छात्रों से अपनी विषय सीमा से बाहर निकलकर सोचने और अंतरविषयक शोध के माध्यम से समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
छात्रों को मिला नई सोच और शोध का संदेश
कार्यक्रम के दौरान दोनों वैज्ञानिकों ने छात्रों को जिज्ञासु, जिम्मेदार और नवाचारी बनने का संदेश दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) का उल्लेख करते हुए शोध को समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर बल दिया।

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के ओरिएंटेशन कार्यक्रम के इन प्रेरक सत्रों ने नवप्रवेशित यूजी, पीजी और पीएचडी छात्रों को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई सोच विकसित करने तथा समाजहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।


