धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (CIKS) ने न्यू वेंचर क्रिएशन एंड टेक्नोलॉजी इनोवेशन (NVCTI) तथा सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE) के सहयोग से सोमवार को “सिविलाइजेशनल एआई एंड फ्यूचर टेक्नोलॉजीज: शेपिंग भारत्स इनोवेशन इकोसिस्टम” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। टेक्समिन स्मार्ट क्लासरूम में आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), नवाचार और भविष्य की तकनीकों पर अपने विचार साझा किए।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित एआई विकसित करने पर जोर
कार्यशाला के पहले सत्र “बिल्डिंग सिविलाइजेशनल एआई” में इमवर्सएआई (ImmverseAI) के सीईओ एवं सह-संस्थापक आर. रामकृष्णन तथा हेड–प्रोडक्ट एंड टेक्नोलॉजी जयरामन अय्यर ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा और बौद्धिक संपदा को ध्यान में रखते हुए ऐसे एआई सिस्टम विकसित किए जाने चाहिए, जो आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय मूल्यों को भी प्रतिबिंबित करें। उन्होंने नवाचार, उद्यमिता और भारतीय ज्ञान प्रणाली के समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया।

भारत बन सकता है भविष्य की तकनीकों का वैश्विक नेतृत्वकर्ता
कार्यशाला के दूसरे सत्र में फ्यूट्रेड इनोवेशन स्टूडियोज के चेयरमैन डॉ. ऋषि मोहन भटनागर ने “भारत: द फ्यूचर टेक्नोलॉजी लीडर” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है। मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम, नवाचार आधारित सोच और युवाओं की प्रतिभा के बल पर भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच हुआ संवाद
कार्यशाला के समापन सत्र में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर सिविलाइजेशनल एआई, नवाचार, स्टार्टअप और भविष्य की तकनीकों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस दौरान शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और नवाचार से जुड़े प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

नवाचार और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
आयोजकों के अनुसार इस प्रकार की कार्यशालाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को नई तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय ज्ञान प्रणाली के समन्वय से परिचित कराना है, ताकि भविष्य में नवाचार आधारित अनुसंधान और उद्यमिता को नई दिशा मिल सके।

