IIT (ISM) धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग स्थित EIACP कार्यक्रम केंद्र ने झारखंड फाउंडेशन केंद्र के सहयोग से और भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान में बोकारो जिले के पिंड्राजोरा में “सतत आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सिक्की कला” विषय पर एक सप्ताह चलने वाले क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम 4 सितंबर तक चलेगा।
IIT (ISM) धनबाद का EIACP (पर्यावरण सूचना, जागरूकता, क्षमता निर्माण एवं आजीविका कार्यक्रम) केंद्र पर्यावरण जागरूकता, सूचना प्रसार, क्षमता निर्माण और सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने की दिशा में काम करता है। यह कार्यक्रम मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) के अनुरूप भी है, जो लोगों और समुदायों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला राष्ट्रीय अभियान है।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए IIT (ISM) धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष तथा EIACP केंद्र के समन्वयक प्रो. आलोक सिन्हा ने कहा, “पारंपरिक कौशल को मजबूत बनाकर समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ सार्थक और टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि इच्छुक प्रशिक्षुओं को IIT (ISM) धनबाद में आयोजित होने वाले प्रमुख संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान स्टॉल लगाकर अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के अवसर दिए जाएंगे।
सिक्की कला एक पारंपरिक हस्तशिल्प है, जिसमें सिक्की घास का कुशलतापूर्वक उपयोग कर टोकरियां, डिब्बे, कंटेनर, आभूषण और अन्य सजावटी एवं उपयोगी वस्तुएं बनाई जाती हैं। यह कला पर्यावरण-अनुकूल आजीविका का अवसर प्रदान करती है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक और स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है।
ESE विभाग के प्रोफेसर (HAG) प्रो. सुनील कुमार गुप्ता ने पारंपरिक आजीविका प्रथाओं के साथ पर्यावरणीय स्थिरता को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। झारखंड फाउंडेशन केंद्र के कार्यकारी निदेशक डॉ. जयदेव महतो ने आजीविका सृजन और सांस्कृतिक संरक्षण में पारंपरिक कला रूपों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों श्रीमती नाजदा खातून और मो. जसीम ने सिक्की कला और इससे जुड़े उत्पादों की संभावनाओं के बारे में जानकारी साझा की। EIACP केंद्र की सूचना अधिकारी डॉ. अवंतिका चंद्रा ने मिशन LiFE की शपथ दिलाई।
इस व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए JSLPS से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों और गृहिणियों सहित कुल 30 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है।
EIACP केंद्र के सह-समन्वयक एवं एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. सुरेश पांडियन ने बताया कि कार्यक्रम के समापन पर कौशल, रचनात्मकता और सहभागिता के आधार पर तीन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को सम्मानित किया जाएगा

