अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को 2026 के मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों—सीनेट और प्रतिनिधि सभा—में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे के बाद ट्रंप के लिए अपने शेष दो वर्षों के कार्यकाल में सरकार की नीतियों और विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण होने से राष्ट्रपति के प्रस्तावों और फैसलों की संसदीय समीक्षा अधिक प्रभावी होगी। विधेयकों को पारित कराने के लिए ट्रंप प्रशासन को विपक्षी दल के साथ बातचीत और सहमति बनानी पड़ सकती है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी को सरकार की नीतियों की जांच और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाने का अवसर मिलेगा।
ईरान युद्ध, महंगाई और टैरिफ नीतियों से बढ़ी नाराजगी
चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे कई मुद्दों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इनमें ईरान के साथ युद्ध, बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतें, ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप प्रमुख हैं। चुनावी विश्लेषणों के मुताबिक, आम मतदाताओं के बीच जीवन-यापन की बढ़ती लागत और युद्ध के आर्थिक प्रभाव को लेकर असंतोष ने डेमोक्रेटिक पार्टी को फायदा पहुंचाया।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध और महंगाई को लेकर मतदाताओं की नाराजगी ने रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ माहौल बनाने में भूमिका निभाई। कई ऐसे चुनावी क्षेत्रों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को सफलता मिली, जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा था।
विवेक रामास्वामी को ओहायो में मिली हार
इन चुनावों में ओहायो के गवर्नर पद का मुकाबला भी चर्चा में रहा। राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थन से चुनाव मैदान में उतरे भारतीय मूल के रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने पराजित किया। इस जीत के साथ एमी एक्टन ओहायो की पहली निर्वाचित महिला गवर्नर बनीं। राज्य में करीब दो दशक बाद डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार गवर्नर पद तक पहुंचा है।
ओहायो में यह मुकाबला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना रहा, क्योंकि ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रामास्वामी के समर्थन में प्रचार किया था। इसके बावजूद एमी एक्टन को जीत मिली। रिपोर्टों के अनुसार, महंगाई, स्वास्थ्य सुविधाओं और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों जैसे मुद्दे उनके प्रचार अभियान के केंद्र में रहे।
सीनेट में डेमोक्रेट्स को बहुमत, प्रतिनिधि सभा में भी बढ़त
अमेरिकी सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें थीं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 45 सीटें थीं और दो सदस्य निर्दलीय थे। चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कई अहम राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हराकर सदन का नियंत्रण हासिल कर लिया। उपलब्ध रिपोर्टों में डेमोक्रेट्स की सीटें 54 और रिपब्लिकन की 44 बताई गई हैं। दो निर्दलीय सदस्यों की स्थिति अलग है।
प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुआ। शुरुआती नतीजों और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। मतगणना और कुछ सीटों के नतीजों की प्रक्रिया जारी रहने के कारण अंतिम सीटों की संख्या में बदलाव संभव है। इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव हुए, जिनमें कई राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को सफलता मिली।
ट्रंप ने हार स्वीकार की, लेकिन वीटो की चेतावनी भी दी
चुनावी झटके के बाद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी को जीत की बधाई दी और देश के हित में मिलकर काम करने की बात कही। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि विपक्ष उनके एजेंडे में बाधा डालता है तो वे राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर वीटो को लेकर संदेश साझा किया। उनका संकेत था कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी सहयोग नहीं करेगी तो वे उसके द्वारा पारित विधेयकों पर वीटो का इस्तेमाल कर सकते हैं। अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति को कांग्रेस से पारित विधेयकों को वीटो करने का अधिकार है। हालांकि, कांग्रेस निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक बहुमत के जरिए राष्ट्रपति के वीटो को पलट भी सकती है।
ट्रंप प्रशासन के लिए आगे की राह होगी चुनौतीपूर्ण
मिडटर्म चुनाव के नतीजों से अमेरिकी राजनीति में सत्ता का संतुलन बदल गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी अब कांग्रेस के दोनों सदनों में अपनी स्थिति का इस्तेमाल सरकार की नीतियों की समीक्षा, जांच और विधायी फैसलों को प्रभावित करने के लिए कर सकती है। वहीं, ट्रंप प्रशासन को बजट, नए कानूनों और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विपक्ष के साथ सहमति बनाने की जरूरत पड़ सकती है।
इन परिणामों का प्रभाव केवल अमेरिकी घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान युद्ध, व्यापार शुल्क और वैश्विक आर्थिक नीतियों को लेकर अमेरिकी सरकार के अगले फैसलों पर भी कांग्रेस में बदले राजनीतिक समीकरण का असर देखने को मिल सकता है।

