धनबाद: स्थानीय शिल्पकारों और माटी कलाकारों के हुनर को नई पहचान दिलाने तथा उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन की ओर से 9 और 10 अगस्त को डीएमसी मॉल में दो दिवसीय ‘शिल्पोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को प्रोत्साहन देने के साथ कलाकारों की आय बढ़ाने में सहयोग करना है।
हस्तशिल्प और माटी कला का होगा प्रदर्शन
शिल्पोत्सव में स्थानीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए लगभग 20 स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके साथ ही माटी कला और विभिन्न हस्तशिल्पों का लाइव डेमो भी आयोजित किया जाएगा, जहां आगंतुक कलाकारों को मिट्टी के बर्तन और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं तैयार करते हुए प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे।
जिला प्रशासन का मानना है कि इस पहल से स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और अधिक लोगों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
भाग लेने के लिए पंजीकरण आवश्यक
शिल्पोत्सव में भाग लेने के इच्छुक ग्रामीण एवं स्थानीय शिल्पकारों के लिए जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी), ऑफिसर्स कॉलोनी, धनबाद में पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इच्छुक प्रतिभागियों को आवेदन के साथ अपना नाम, मोबाइल नंबर, हस्तशिल्प या कला का प्रकार, पता और आधार संख्या जैसी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
पंजीकरण और आयोजन से संबंधित जानकारी के लिए जिला उद्योग केंद्र द्वारा दूरभाष एवं ई-मेल के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
उत्कृष्ट स्टॉल और बेहतर बिक्री करने वालों को मिलेगा सम्मान
आयोजन के दौरान सबसे आकर्षक स्टॉल लगाने वाले तथा सबसे अधिक बिक्री करने वाले स्टॉल धारकों को जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिल्पकारों को बेहतर प्रदर्शन और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है।
प्रशासन का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और कलाकारों को अपने उत्पादों के लिए नए ग्राहक मिल सकेंगे।
नागरिकों से स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील
उपायुक्त आदित्य रंजन ने जिले के नागरिकों से 9 और 10 अगस्त को डीएमसी मॉल पहुंचकर शिल्पोत्सव का अवलोकन करने तथा स्थानीय हस्तशिल्प एवं माटी उत्पादों की खरीदारी करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों के उत्पाद खरीदकर लोग न केवल स्वदेशी कला को प्रोत्साहित करेंगे, बल्कि उनके रोजगार और आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।
जिला प्रशासन की इस पहल को स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिल्पोत्सव के माध्यम से कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ अपने उत्पादों के लिए नया बाजार भी उपलब्ध होने की उम्मीद है।
