धनबाद में खदान प्रभावित गांवों के विकास की तैयारी, ग्राम सभा से तय होंगी योजनाएं

धनबाद में खदान प्रभावित गांवों के विकास की तैयारी, ग्राम सभा से तय होंगी योजनाएं

धनबाद, 1 अक्टूबर। कोयला खनन बंद होने के बाद प्रभावित गांवों में सामुदायिक सुविधाओं के विकास और स्थानीय लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। गुरुवार को समाहरणालय स्थित डीएमएफटी सभागार में उप विकास आयुक्त सन्नी राज की अध्यक्षता में माइन्स क्लोजर एडवायजरी कमिटी की बैठक हुई। इसमें बीसीसीएल, ईसीएल और सेल के खदान क्षेत्रों से जुड़े गांवों के विकास की योजनाओं पर चर्चा की गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि खदानों से पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाली पंचायतों की संबंधित माइंस के साथ सटीक मैपिंग कराई जाएगी। साथ ही, विकास योजनाओं का चयन और स्वीकृति ग्राम सभा के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी।

खदानों के पांच किलोमीटर दायरे की पंचायतों की होगी मैपिंग

उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने बीसीसीएल के बरोरा, ब्लॉक-2, गोविंदपुर, सिजुआ, कतरास, कुसुंडा, पुटकी बलिहारी, पश्चिमी झरिया और पूर्वी झरिया क्षेत्रों के साथ ईसीएल के मुगमा क्षेत्र तथा सेल की खदानों के आसपास की पंचायतों की मैपिंग कराने का निर्देश दिया।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां जरूरत के अनुसार विकास योजनाएं तैयार करना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि योजनाओं के चयन में ग्राम सभा की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी, ताकि स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।

निर्माण कार्य से पहले पूरी करनी होगी निर्धारित प्रक्रिया

बैठक में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी निर्देश दिए गए। उप विकास आयुक्त ने कहा कि किसी भी सिविल निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले विस्तृत चेकलिस्ट तैयार की जाए।

सरकारी भूमि पर प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए संबंधित अंचल अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य योजनाओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लागू करना और निर्माण से पहले भूमि संबंधी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना है।

बरोरा से कुसुंडा तक कई विकास प्रस्ताव पेश

बैठक में विभिन्न कोलियरी क्षेत्रों की ओर से सामुदायिक कल्याण से जुड़े प्रस्ताव रखे गए। इनमें बुनियादी सुविधाओं के विकास, जलस्रोतों के जीर्णोद्धार और सार्वजनिक स्थलों को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।

  • बरोरा एरिया: पंचायतों में सोलर लाइट लगाने तथा सार्वजनिक कुओं की मरम्मत और जीर्णोद्धार का प्रस्ताव।
  • ब्लॉक-2 एरिया: तालाब घाटों के जीर्णोद्धार और सोलर लाइट लगाने की योजना।
  • गोविंदपुर एरिया: स्नान घाटों के निर्माण और सोलर लाइट की व्यवस्था का प्रस्ताव।
  • सिजुआ एरिया: खेल मैदान में क्रिकेट पिच बनाने तथा तालाबों की सफाई और सौंदर्यीकरण की योजना।
  • कतरास एरिया: झिंझी पहाड़ी में योग केंद्र की स्थापना और केशलपुर पंचायत भवन के सभागार का जीर्णोद्धार।
  • कुसुंडा एरिया: मुक्तिधाम और तालाबों के जीर्णोद्धार के साथ चेक डैम निर्माण का प्रस्ताव।

इन प्रस्तावों का उद्देश्य प्रभावित पंचायतों में सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाना है। इनके क्रियान्वयन से पहले निर्धारित प्रक्रिया और ग्राम सभा की स्वीकृति का पालन किया जाएगा।

ओपन जिम, पौधारोपण और रोजगार पर भी जोर

पुटकी बलिहारी एरिया की ओर से नेहरू पार्क में ओपन जिम स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। वहीं, पूर्वी झरिया एरिया ने तालाबों के जीर्णोद्धार, बड़े पैमाने पर पौधारोपण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करने के लिए कप-प्लेट निर्माण मशीन लगाने का प्रस्ताव दिया।

बैठक में रखे गए प्रस्तावों के जरिए पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्थलों के उपयोग और स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया।

बीसीसीएल, ईसीएल, सेल और पंचायत प्रतिनिधि रहे मौजूद

बैठक में जिला खनन पदाधिकारी रितेश राज तिग्गा, बीसीसीएल के महाप्रबंधक (पर्यावरण) राजन कुमार, उप प्रबंधक (पर्यावरण) चिराग चोपड़ा और डीएमएफटी टीम लीडर शैलेश तिवारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा बीसीसीएल के सभी 12 क्षेत्रों के प्रोजेक्ट ऑफिसर, ईसीएल और सेल के पदाधिकारी तथा प्रभावित पंचायतों के मुखिया भी बैठक में शामिल हुए।

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