धनबाद। दुर्गा पूजा के दौरान धनबाद में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के बीच जामताड़ा जिले के रघुनाथपुर से संथाल समाज के करीब 25 लोगों की मंडली पहुंची है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे मंडली के सदस्य शहर के विभिन्न बाजारों और दुकानों में घूमकर दासांय नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं। इस माध्यम से वे सहयोग राशि और चंदा एकत्र कर अपने गांव में उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
पहली बार धनबाद पहुंची 25 लोगों की मंडली
मंडली के सदस्य सुधीर कुमार हंसदा ने बताया कि उनकी टीम पहली बार जामताड़ा के रघुनाथपुर से धनबाद आई है। नवरात्र के नौ दिनों तक वे अपने गांव से बाहर रहकर विभिन्न दुकानों और बाजारों में पारंपरिक नृत्य-गान प्रस्तुत करते हैं।
उन्होंने बताया कि मंडली के सदस्य सिर पर पारंपरिक गमछा और मोरपंख धारण कर अपनी लोकसंस्कृति की झलक पेश करते हैं। इस दौरान लोग उन्हें सहयोग राशि देते हैं।
दासांय नृत्य से जुटाते हैं सहयोग राशि
सुधीर कुमार हंसदा के अनुसार, मंडली नवरात्र के दौरान नाच-गान के माध्यम से जो सहयोग राशि एकत्र करती है, उसका इस्तेमाल सामूहिक उत्सव और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता है। इससे समाज के लोग आपस में खुशियां बांटते हैं और पूजा-पाठ की परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं।
संथाल समाज की परंपरा से जुड़ा है दासांय नृत्य
दासांय नृत्य संथाल समाज की पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में शामिल है। दशहरा और नवरात्र के अवसर पर इस तरह की प्रस्तुतियों के माध्यम से लोकपरंपराओं को जीवंत रखा जाता है। पारंपरिक वेशभूषा, सामूहिक नृत्य और गीत इस सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।
लोकसंस्कृति और सामूहिक उत्सव का संगम
धनबाद के बाजारों में नृत्य प्रस्तुत कर रही मंडली अपनी सांस्कृतिक परंपरा से लोगों को परिचित करा रही है। मंडली के सदस्यों के लिए यह केवल सहयोग राशि जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी लोकसंस्कृति और सामूहिक उत्सव की परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।

