धनबाद: नगर निगम के बकाये की वसूली को लेकर जिला प्रशासन ने असर्फी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन के निर्देश पर नीलाम पत्र पदाधिकारी राम नारायण खालको के न्यायालय ने अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरेन्द्र सिंह को नोटिस जारी किया है। नोटिस में 3 करोड़ 27 लाख 64 हजार 750 रुपये और उस पर देय ब्याज की वसूली का मामला उठाया गया है।
जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से 29 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह कार्रवाई धनबाद नगर आयुक्त की याचिका के आधार पर की गई है। अस्पताल प्रबंधन को नोटिस मिलने के 30 दिनों के भीतर अपना जवाब या आपत्ति दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, 13 नवंबर 2026 को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आवश्यक साक्ष्य और प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
3.27 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि का मामला
प्रशासन के अनुसार, असर्फी अस्पताल पर धनबाद नगर निगम का कुल 3,27,64,750 रुपये बकाया है। इसके अतिरिक्त, नियमानुसार देय ब्याज की भी वसूली की जानी है। इसी राशि की वसूली के लिए नीलाम पत्र पदाधिकारी के न्यायालय में कार्रवाई की गई है।
यह मामला बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 की धारा 7 के तहत शुरू किया गया है। नगर आयुक्त, धनबाद ने बकाये की वसूली के लिए याचिका दायर की थी, जिसके आधार पर अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नोटिस जारी किया गया।
13 नवंबर को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश
जारी नोटिस में अस्पताल प्रबंधन को अपनी आपत्ति या जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस की तामील से 30 दिनों का समय दिया गया है। इसके साथ ही 13 नवंबर 2026 को नीलाम पत्र पदाधिकारी के न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और मामले से संबंधित जरूरी दस्तावेज तथा प्रमाण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
इस प्रक्रिया के तहत अस्पताल प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जवाब, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।

अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत देनदार को अपनी अचल संपत्ति बेचने, दान करने, बंधक रखने या किसी अन्य तरीके से हस्तांतरित करने पर रोक लगाई गई है। इसका उद्देश्य वसूली की प्रक्रिया के दौरान संपत्ति के हस्तांतरण को रोकना है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का अनुपालन नहीं होने की स्थिति में अधिनियम के तहत कुर्की और वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि वसूली की पूरी प्रक्रिया अंतिम रूप से पूरी हो गई है।
सरकारी बकाये की वसूली पर प्रशासन सख्त
उपायुक्त आदित्य रंजन ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम और अन्य सरकारी देयों की वसूली में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नियमानुसार कार्रवाई जारी रखने पर जोर दिया है।
असर्फी अस्पताल से जुड़े इस मामले में अब अस्पताल प्रबंधन के जवाब और 13 नवंबर को होने वाली न्यायालय की कार्यवाही पर नजर रहेगी। जिला प्रशासन का कहना है कि सरकारी बकाये की वसूली के लिए कानूनी प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

