भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग के सामने परिजनों और गवाहों के बयान दर्ज

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग के सामने परिजनों और गवाहों के बयान दर्ज

भोजपुर। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच जारी है। जांच के दूसरे दिन सोमवार को मृतक की भाभी सुमन देवी समेत दो गवाहों ने न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया।

सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिन्हा के समक्ष सुमन देवी, सत्यनारायण चौधरी और मंटू कमकर ने अपना पक्ष रखा। आयोग ने तीनों से घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ की। जानकारी के अनुसार, सुमन देवी से करीब डेढ़ घंटे तक सवाल-जवाब किए गए।

परिजनों ने न्याय की जताई उम्मीद

बयान दर्ज कराने के बाद सुमन देवी ने कहा कि उन्होंने आयोग के समक्ष घटना से जुड़ी पूरी जानकारी साझा की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गवाह का दावा

गवाह सत्यनारायण चौधरी ने आयोग के समक्ष दावा किया कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन बाद में उन्हें घटनास्थल से कुछ दूरी पर ले जाकर गोली मार दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय मौके पर प्रशासन के कई अधिकारी और सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। आयोग ने उनसे भी विस्तृत पूछताछ की।

हालांकि, यह गवाह का दावा है। इस संबंध में आयोग की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

गवाही के दौरान न्यायिक जांच आयोग कार्यालय परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और परिसर में आने-जाने वालों की निगरानी की गई।

पहले माता-पिता ने दर्ज कराया था बयान

इससे पहले 11 जुलाई को मृतक के माता-पिता आशा देवी और काशीनाथ तिवारी भी न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। बयान के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में मामले में शामिल कुछ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाए थे। मृतक के अधिवक्ता विष्णुधर पांडेय के अनुसार, परिजनों ने आयोग के समक्ष घटना से जुड़ी अपनी जानकारी और अपना पक्ष रखा था।

फिलहाल न्यायिक जांच आयोग विभिन्न पक्षों के बयान दर्ज कर मामले के सभी तथ्यों की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा।

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