रांची: भाजपा नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने छात्र आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में मरांडी ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सत्ता का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में झारखंड आंदोलन के संदर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो नेता शिबू सोरेन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर सड़कों पर उतरकर आंदोलन और संघर्ष किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत अब छात्रों के आंदोलन को दबाने तक सीमित रह गई है।
‘छात्रों की आवाज दबाने के लिए सत्ता का इस्तेमाल’
मरांडी ने आरोप लगाया कि जिन आंदोलनों और जनआवाज के जरिए शिबू सोरेन ने अपनी पहचान बनाई, आज उसी आवाज को दबाने के लिए सत्ता का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने झामुमो कार्यकर्ताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो छात्र अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, उन्हें लेकर आपत्तिजनक नजरिया नहीं अपनाया जाना चाहिए। भाजपा नेता ने सवाल किया कि लोकतांत्रिक संघर्ष की परंपरा की बात करने वाले लोग छात्रों के आंदोलन को किस नजर से देखते हैं।
हेमंत सोरेन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की अपील
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों के बीच जाकर उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में शिबू सोरेन के विचारों और संघर्ष का सम्मान करते हैं तो उन्हें सत्ता के अहंकार से बाहर निकलकर आंदोलन कर रहे छात्रों से संवाद करना चाहिए।
मरांडी ने अपने पोस्ट में छात्रों को ‘पीड़ित और हताश’ बताते हुए मुख्यमंत्री से उनके बीच जाने और उनकी समस्याएं सुनने की मांग की।
‘छात्रों पर लाठी चलाने का आदेश किसने दिया?’
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे छात्रों पर लाठी चलाने और उनसे पुतला छीनने का आदेश किस अधिकारी ने दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस कथित घटना पर डीजीपी से जवाब-तलब करने की मांग की। मरांडी ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो जनता इसे सरकार की जिम्मेदारी से जोड़कर देख सकती है।
हालांकि, बाबूलाल मरांडी के पोस्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है। घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित प्रशासनिक या पुलिस पक्ष से होना बाकी है।
न्यायपालिका से स्वतः संज्ञान लेने की अपील
बाबूलाल मरांडी ने न्यायपालिका से भी मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाना गंभीर विषय है और ऐसी घटनाओं पर संस्थागत स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मरांडी के इस बयान के बाद छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत हैं। भाजपा नेता ने अपने पोस्ट के जरिए सरकार से छात्रों के साथ संवाद करने और कथित पुलिस कार्रवाई पर जवाब देने की मांग की है।

