अमेरिका के साथ लंबे समय से जारी युद्ध के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अब युद्ध खत्म करने की बात कही है। शुक्रवार को डॉक्टरों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में ईरान मजबूत स्थिति में है और अब युद्ध को खत्म करना बेहतर होगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच राजनयिक बातचीत अभी भी रुकी हुई है।
पेजेश्कियान बोले- ईरान मजबूत स्थिति में
पेजेश्कियान ने कहा कि दुनिया ईरान की स्थिति और उसकी जीत को स्वीकार कर रही है। उन्होंने अमेरिका पर ईरान के स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने जून में अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन का भी बचाव किया। ईरान के कुछ कट्टरपंथी नेताओं ने उनकी सरकार पर अमेरिका को रियायतें देने का आरोप लगाया था। पेजेश्कियान ने कहा कि समझौते में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे ईरान का आत्मसमर्पण कहा जा सके।
ईरानी सेना ने दी कड़े जवाब की चेतावनी
समझौता ज्ञापन की अवधि खत्म होने के कुछ दिन बाद ईरानी सेना ने भी अपनी तैयारी को लेकर बयान दिया है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि ईरान की थल सेना, नौसेना, वायु सेना, वायु रक्षा और साइबर क्षमताएं पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान को कोई नया खतरा मिला तो सेना उसका कड़ा जवाब देगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव
इस बीच ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों ने शुक्रवार को फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए जरूरी परिस्थितियां बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्थिति पर चर्चा की।
ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को अभी भी आंशिक रूप से बंद रखा है। वहीं, अमेरिका की ओर से भी समुद्री नाकाबंदी जारी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना होर्मुज के दक्षिणी हिस्से से तेल टैंकरों के कुछ काफिलों को सुरक्षित रास्ता दे रही है।
ट्रंप बोले- ईरान सही समझौते के लिए तैयार नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की बातचीत की इच्छा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण है। उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उनकी नजर में वह अभी सही समझौते के लिए तैयार नहीं है।
ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि जो भी देश ईरान को किसी भी तरह की मदद करेगा, उसे आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

