पटना में बाढ़ का बढ़ता खतरा, चार नदियों ने घेरा शहर; तटबंध और ड्रेनेज सिस्टम पर बढ़ा दबाव

पटना में बाढ़ का बढ़ता खतरा, चार नदियों ने घेरा शहर; तटबंध और ड्रेनेज सिस्टम पर बढ़ा दबाव

पटना: राजधानी पटना में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। दियारा इलाकों के बाद अब जिले के कई निचले हिस्सों में भी नदियों का पानी पहुंचने लगा है। कई जगह तटबंधों से पानी रिसने की खबर है, जबकि कुछ सड़कें पानी में डूब गई हैं और कई जगह सड़कें बह भी गई हैं।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हालात 2019 जैसी स्थिति तक न पहुंचें, जब पटना के कई इलाकों में नाव चलाने की नौबत आ गई थी।

पटना में बाढ़ का खतरा किसी एक नदी की वजह से नहीं है। जिले को गंगा, सोन, पुनपुन और दरधा नदियों का पानी प्रभावित करता है। वहीं, उत्तर में गंडक का बढ़ता जलस्तर भी गंगा पर दबाव बढ़ा रहा है।

गंगा का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता

पटना जिले में बाढ़ का सबसे बड़ा खतरा गंगा से है। इसका असर मनेर, दानापुर, दीघा, पटना शहर, पटना सिटी, फतुहा, बख्तियारपुर और मोकामा तक दिखाई दे सकता है।

गंगा का पानी बढ़ने पर सबसे पहले नदी किनारे के दियारा क्षेत्र, खेत और संपर्क सड़कें डूबती हैं। इसके बाद निचले गांवों और तटबंधों पर दबाव बढ़ने लगता है।

अगर गंगा का जलस्तर लंबे समय तक ऊंचा रहता है, तो शहर के ड्रेनेज सिस्टम और तटबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

सोन और गंगा के पानी से दोहरी परेशानी

सोन नदी का गंगा से मिलन मनेर के पास होता है। ऐसे में अगर गंगा और सोन दोनों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला जाता है, तो मनेर और आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ जाता है।

पुनपुन और दरधा से भी बढ़ी चिंता

पुनपुन नदी में पानी बढ़ने से पालीगंज, नौबतपुर, पुनपुन, संपतचक और फतुहा के निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है।

वहीं, दरधा नदी पुनपुन की प्रमुख सहायक नदी है। इसके बढ़ते जलस्तर का असर धनरुआ और मसौढ़ी के आसपास के गांवों, खेतों, सड़कों और तटबंधों पर दिखाई दे रहा है।

दरधा में ज्यादा पानी आने से स्थानीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने के साथ पुनपुन नदी पर भी दबाव बढ़ सकता है।

पटना में बाढ़ के चार चरण

पहला चरण: नदी के किनारे खेत, कच्चे मकान और संपर्क रास्ते पानी में डूबने लगते हैं।

दूसरा चरण: घाट, नदी किनारे की सड़कें और निचले इलाकों के घरों तक पानी पहुंच जाता है।

तीसरा चरण: नदी का जलस्तर लंबे समय तक ऊंचा रहने पर तटबंधों पर दबाव बढ़ता है। इससे रिसाव और कटाव का खतरा पैदा हो जाता है।

चौथा चरण: अगर नदी का पानी शहर के नालों के आउटफॉल से ऊपर पहुंच जाता है, तो बारिश और सीवरेज का पानी बाहर नहीं निकल पाता। इससे शहर के निचले इलाकों में तेजी से जलजमाव हो सकता है।

31 इलाके अति संवेदनशील

बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने जिले में 31 जगहों को अति संवेदनशील और 181 जगहों को संवेदनशील घोषित किया है।

अधिकारियों की चिंता सिर्फ नदी के पानी को लेकर नहीं है। अगर गंगा का जलस्तर शहर के ड्रेनेज पाइप से ऊपर चला गया, तो सीवरेज के साथ नदी का पानी भी शहर के अंदर आने का खतरा बढ़ सकता है।

फिलहाल प्रशासन की नजर गंगा समेत सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर बनी हुई है।

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