धनबाद में भारतीय मजदूर संघ का धरना, श्रमिकों ने 30 हजार न्यूनतम वेतन समेत उठाईं कई मांगें

धनबाद में भारतीय मजदूर संघ का धरना, श्रमिकों ने 30 हजार न्यूनतम वेतन समेत उठाईं कई मांगें

धनबाद, 17 अगस्त 2026: श्रमिकों की विभिन्न लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर भारतीय मजदूर संघ (BMS) की ओर से सोमवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं समेत बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से श्रमिकों की विभिन्न मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की।

न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये करने की मांग

धरना-प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी जरूरी है।

इसके साथ ही EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपये प्रतिमाह करने और पेंशन के साथ महंगाई भत्ता देने की मांग भी रखी गई।

EPF और ESI की सीमा बढ़ाने की मांग

भारतीय मजदूर संघ की ओर से ईपीएफ वेतन सीमा को वर्तमान 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग की गई।

वहीं, ईएसआई की वेतन सीमा को 21 हजार रुपये से बढ़ाकर 42 हजार रुपये करने की मांग भी प्रदर्शन के दौरान उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग भी रखी।

आंगनबाड़ी और योजना कर्मियों के लिए भी उठी आवाज

धरना-प्रदर्शन में आंगनबाड़ी सहित विभिन्न योजना कर्मियों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने आंगनबाड़ी और अन्य योजना कर्मियों को श्रमिक का दर्जा देने तथा उनके मानदेय में बढ़ोतरी करने की मांग की।

इसके अलावा श्रम संहिताओं में मौजूद श्रमिक विरोधी प्रावधानों को हटाने की मांग भी की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि श्रमिकों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा।

देशभर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन

भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर सोमवार को देश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में श्रमिकों की मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया। इसी क्रम में धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर भी धरना आयोजित किया गया।

प्रदर्शन के माध्यम से श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार के समक्ष वेतन, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक अधिकारों से जुड़ी अपनी मांगें रखीं।

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