धनबाद समाहरणालय में जीवंत हुई प्रशासनिक विरासत, विंटेज एंबेसडर और जिप्सी नए कलेवर में प्रदर्शित

धनबाद समाहरणालय में जीवंत हुई प्रशासनिक विरासत, विंटेज एंबेसडर और जिप्सी नए कलेवर में प्रदर्शित

धनबाद: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर धनबाद जिला प्रशासन ने जिले की प्रशासनिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में अनूठी पहल की है। समाहरणालय परिसर में पूर्व प्रशासनिक दौर की गवाह रहीं उपायुक्त की आधिकारिक एंबेसडर कार और एसएसपी की प्रतिष्ठित मारुति जिप्सी को नए कलेवर में प्रदर्शित किया गया है।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने इन दोनों ऐतिहासिक वाहनों को पुनर्निर्मित कर आम लोगों के लिए समाहरणालय परिसर में स्थापित कराया है।

पुराने स्वरूप में तैयार किए गए ऐतिहासिक वाहन

धनबाद उपायुक्त की आधिकारिक एंबेसडर कार, जिसका नंबर जेएच 10 एच 0055 है, और धनबाद एसएसपी की मारुति जिप्सी, जिसका नंबर जेएच 10 सी 0022 है, को उनके मूल विंटेज स्वरूप के अनुरूप तैयार किया गया है।

जिला प्रशासन के अनुसार, इन वाहनों की डेंटिंग-पेंटिंग, इंटीरियर, इंजन पार्ट्स, लाइट और लोगो समेत अन्य हिस्सों को बारीकी से तैयार किया गया है। दशकों तक ये वाहन जिले की प्रशासनिक गतिविधियों और जनसेवा से जुड़े कार्यों के साक्षी रहे हैं।

प्रशासन और पुलिस के समन्वय का प्रतीक

जिला प्रशासन ने बताया कि सफेद एंबेसडर को भारतीय प्रशासनिक सेवा की पहचान और मारुति जिप्सी को पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से जोड़कर देखा जाता रहा है। दोनों वाहनों को एक साथ प्रदर्शित करने का उद्देश्य प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय को भी दर्शाना है।

इन वाहनों को देखकर नई पीढ़ी धनबाद के प्रशासनिक सफर और पुराने दौर की कार्यप्रणाली से परिचित हो सकेगी।

आम लोगों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र

समाहरणालय परिसर में स्थापित किए गए इन विंटेज वाहनों को अब आम नागरिक, युवा और छात्र-छात्राएं करीब से देख सकेंगे। जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल केवल पुराने वाहनों को संरक्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि धनबाद के प्रशासनिक इतिहास और विरासत को आम लोगों से जोड़ने का प्रयास भी है।

अधिकारियों के अनुसार, इससे समाहरणालय परिसर के सौंदर्य में भी वृद्धि होगी और ये वाहन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

प्रशासनिक इतिहास को संरक्षित करने की पहल

उपायुक्त और एसएसपी ने कहा कि सरकारी सेवा से निष्प्रयोज्य हो चुके ऐतिहासिक महत्व के वाहनों को संरक्षित करना जिले की प्रशासनिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन वाहनों के माध्यम से धनबाद के प्रशासनिक इतिहास की एक झलक आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाई जा सकेगी।

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