अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने पाकिस्तान पर सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का इस संधि को रोकने का फैसला अचानक नहीं था, बल्कि पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे रवैये का परिणाम है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया फैसला
न्यूज़वीक में प्रकाशित अपने लेख में विनय क्वात्रा ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से दी जा रही युद्ध की धमकियां सिर्फ उसकी घरेलू समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश हैं।
आतंकवाद खत्म करने की सलाह
क्वात्रा ने कहा कि अगर पाकिस्तान भारत के साथ किसी भी द्विपक्षीय मुद्दे पर बातचीत और सहयोग चाहता है, तो उसे सबसे पहले आतंकवाद के ढांचे को खत्म करना होगा।
भारतीय राजदूत ने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि अच्छी नीयत और दोस्ती की भावना के साथ हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने पिछले कई दशकों में उसी भावना को कमजोर किया है। उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब पाकिस्तान ने हाल ही में इस्लामाबाद में एक सम्मेलन आयोजित कर भारत के सिंधु जल संधि को रोकने के फैसले का विरोध किया था।
‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते’
उन्होंने कहा, “जो लोग भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की वकालत कर रहे हैं, उन्होंने या तो अतीत में हुई ऐसी बातचीत के इतिहास पर ध्यान नहीं दिया है या फिर उन्हें लगता है कि बार-बार वही काम करके अलग नतीजों की उम्मीद करना पागलपन नहीं है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत का रुख साफ कर दिया है कि आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते. पानी और खून साथ-साथ नहीं बह सकते.”
पाकिस्तान को लेकर क्या बोले क्वात्रा
पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए क्वात्रा ने कहा कि अपनी अंदरूनी समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ युद्ध की धमकी देना इस्लामाबाद की एक आम नीति बन गई है. कुछ हफ्ते पहले पाकिस्तान सरकार ने सिंधु जल संधि को कुछ समय के लिए रोकने के भारत के फैसले का विरोध करने के लिए इस्लामाबाद में एक सम्मेलन बुलाया था.
उस बैठक में, एक पूर्व विदेश मंत्री ने धमकी दी कि अगर सिंधु नदी प्रणाली पर पाकिस्तान की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वह भारत के खिलाफ युद्ध करेगा.
सिंधु जल संधि पर क्या कहा
1960 के समझौते पर बात करते हुए भारतीय राजदूत ने मूल ढांचे में मौजूद संरचनात्मक असंतुलन को उजागर किया. क्वात्रा ने न्यूज़वीक के लेख में लिखा, “सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान ने 1960 में हस्ताक्षर किए थे.
इसने सिंधु बेसिन की 6 प्रमुख नदियों को 2 समूहों में विभाजित किया. भारत को 3 पूर्वी नदियों का कंट्रोल मिला, जिनमें बेसिन के पानी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बहता है, जबकि पाकिस्तान को 3 पश्चिमी नदियां मिलीं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत पानी बहता है.

